आज 21 जून को पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है। योग मुद्राओं का अभ्यास कर शरीर को चुस्त रखने की कोशिश जरूर है। इसी योग दिवस पर यह संकल्प भी जरूरी है कि योग को नित क्रियाओं को शामिल करें तभी इसका लाभ शरीर को मिलेगा। तभी हम आत्म साक्षात्कार की ओर बढ़ेंगे। इस अवसर इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह रिपोर्ट….
इंदौर। भारत में ध्यान और योग की विधा अनादि अनंत है। भारतीय दर्शन में योग आत्म-साक्षात्कार के लिए महत्वपूर्ण साधन माना जाता है। वही जैन दर्शन में योग में शारीरिक, मानसिक और आत्मिक अभ्यास के लिए एक साधन के रूप में उपयोग में लाया जाता है। योग के माध्यम से व्यक्ति अपने शरीर और मन को नियंत्रित कर सकता है, जिससे ध्यान में स्थिरता और एकाग्रता प्राप्त होती है और ध्यान की उत्कृष्ट अवस्था मोक्ष प्राप्ति के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संक्षेप में कहें तो जैन दर्शन में ध्यान और योग नर से नारायण बनने का एक महत्वपूर्ण अंग है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के पाटोदी ने बताया कि विश्व स्तर पर योग की पहल भारत ने ही की। 11 वर्ष पूर्व 27 सितंबर 2014 को भारत द्वारा की गई। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में इंटरनेशनल योगा डे को मनाने के लिए प्रस्ताव रखा। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और प्रत्येक वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा भी की गई और फिर 21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। पाटोदी ने बताया कि तीर्थंकरों की लाखों प्रतिमाएं योग मुद्रा की पूरे भारत में देखी जा सकती है।
आध्यात्मिक चेतना जागरण योग से संभव
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो भगवान महावीर और बुद्ध और प्रागैतिहासिक दृष्टि से देखे तो उसके पूर्व ऋषभदेव, शिव, आदिनाथ और बाहुबली की पद्मासन, खड़गासन, सुखासन वाली प्रतिमाएं हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करवाती है कि योग की विधा हमारे यहां हजारों लाखों वर्ष पुरानी हैं। आदिनाथ और शिव की जटायुक्त प्रतिमाएं योग की महत्वता को प्रदर्शित करती है। यहा एक बात ध्यान में रखें कि भारत में योग का संबंध आध्यात्मिक चेतना जगाने के लिए किया जाता था शरीर को निरोगी रखना तो उसका एक बायप्रोडक्ट कहा जा सकता है।
बीमारियों पर विजय का माध्यम योग
योग के अनेक शारीरिक फायदे हैं, जैसे इससे हमारा पाचन तंत्र ठीक रहता है,मांसपेशियों में लचीलापन रहता है, यह हमारे आंतरिक अंग मजबूत करता है, मधुमेह, अस्थमा, जैसे रोगो को दूर रखता है, रक्त संचार बेहतर रहता है,हृदय-विकारों का इलाज संभव है। ऐसी ही कई बीमारियों से हमें योग दूर रखता है। डाक टिकटों की बात करें तो पर योगाभ्यास की पहली पहली तस्वीर 30 दिसंबर 1991 को जारी की गई जिसमें 4 डाक टिकट भुजंगासन, धनुरासन, उध्दासन और उत्थित त्रिकोणासन आसन के जारी किए गए उसके पश्चात कई डाक टिकट योग पर जारी हुए।













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