दिगंबर जैन समाज अंबाह के तत्वाधान में पंडित शशांक शास्त्री एवं पंडित सिद्धांत शास्त्री के मार्गदर्शन में आयोजित बाल संस्कार शिविर के समापन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मौजूद बच्चों एवं समाज जनों को संबोधित करते हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि हमें भगवान महावीर के दर्शन के अनुरूप जैन संस्कार देने में ऐसे धार्मिक नैतिक संस्कार शिविर अहम भूमिका निभा रहे हैं। ग्रीष्मावकाश के समय का बच्चों के लिए इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता। पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…
अम्बाह। दिगंबर जैन समाज अंबाह के तत्वाधान में पंडित शशांक शास्त्री एवं पंडित सिद्धांत शास्त्री के मार्गदर्शन में आयोजित बाल संस्कार शिविर के समापन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मौजूद बच्चों एवं समाज जनों को संबोधित करते हुए पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि हमें भगवान महावीर के दर्शन के अनुरूप जैन संस्कार देने में ऐसे धार्मिक नैतिक संस्कार शिविर अहम भूमिका निभा रहे हैं। ग्रीष्मावकाश के समय का बच्चों के लिए इससे बेहतर उपयोग नहीं हो सकता है कि हम इसके माध्यम से अपने धर्म को जानें और सीखें।
धर्म के साथ हमारी अभिरुचियों को भी विकसित करने में ऐसे शिविर उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे सुसंस्कारित होकर ही देश के आदर्श नागरिक और जिनशासन के आदर्श श्रावक-श्राविका बन सकते हैं। उन्होंने शिविर में सहयोग के लिए वीतराग शासन बालिका मंडल की बालिकाओं का धन्यवाद अर्पित किया, जिन्होंने ग्रीष्मावकाश को सार्थक बनाने के लिए शिविर में सहयोग किया। शिविर में धार्मिक अध्ययन कराने के साथ साथ बच्चों को निरोगी काया रखने के लिए योग करने ओर अभिरुचि विकसित करने के लिए नृत्य सीखने का भी अवसर प्राप्त हुआ। कुमारी राजुल जैन ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाने के लक्ष्य से विनम्र एकेडमी ने इस शिविर में सहयोग प्रदान किया और हम सदैव इसके लिए तत्पर रहेंगे।
नगर पालिका अध्यक्ष अजंली जैन ने कहा कि कहा कि संस्कार शिविर और पाठशालाएं हमारे जैनत्व की नींव को मजबूती प्रदान करने में सहायक साबित हो रही हैं। शिविर के समापन पर शिविरार्थी बच्चों ने धार्मिक भावना से ओतप्रोत विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सराहना प्राप्त की। ज्ञात रहे कि शिविर में बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखते हुए धार्मिक, नैतिक, भौतिक शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का भी बीजारोपण किया गया। सात दिनों में धार्मिक शिक्षण के साथ धर्म-संस्कार को ग्रहण करते हुए बच्चों ने नित्य देव दर्शन, पूजन, दान, माता-पिता व बड़ों का आदर करना, सप्त व्यसन का त्याग, कंदमूल का त्याग आदि कई नियम को ग्रहण करते हुए जीवन जीने की कला, आत्मरक्षा, जीवदया, कला, नाट्य, गायन, धर्मानुसार सुरक्षा कवच, दान परंपरा, अन्य जीवों की रक्षा करना आदि के साथ बच्चों को खेल-खेल में धार्मिक पाठ याद करवाए गए। शिविर के दौरान बच्चों को देव वंदना करवाई गई। पंडित सिद्धांत शास्त्री, पंडित शशांक शास्त्री द्वारा बच्चों को पूजन के आठ द्रव्य, जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप, फल आदि का पाठ समझाया गया।













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