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जीवन को खुशहाल बनाना है तो आग्रहपूर्ण प्रवृत्ति त्यागेंः पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों एवं भगवान के माता-पिता की गोद भराई होगी


जीवन को सुखी बनाना है तो आग्रह पूर्ण प्रवृत्ति को त्यागना होगा। दिगंबर जैन समाज के लोगों को यह उपदेश मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नेमीनगर में प्रातःकालीन धर्म सभा में दिए। इंदौर से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर…


इंदौर। पहले परिवार में दादा-दादी चाचा-चाची हुआ करते थे और यदि कोई बात होती थी तो वह संभाल लिया करते थे। आजकल तो छोटी-छोटी बातों पर व्यक्ति आग्रह कर अड़ जाता है और दुराग्रह पैदा हो जाते हैं। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नेमीनगर में प्रातःकालीन धर्म सभा में यह प्रबोधन दिया। उन्होंने विनोद पूर्ण लहजे में एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि घर में पति-पत्नी थे और अपनी भविष्य की संतान के विषय में सोच रहे थे। पत्नी की इच्छा डाक्टर बनाने की थी जबकि, पति उसे वैज्ञानिक बनाना चाहता था। पत्नी कहती मैं नौ माह तक अपनी संतान को अपने पेट में रखूंगी मैं उसकी मां हूं, उसे डॉक्टर ही बनाऊंगी और पिता कहता कि आजकल गली-गली में डाक्टर हैं। मैं अपने बेटे को वैज्ञानिक ही बनाऊंगा। दोनों अपनी जिद पर अड़ गए और बात तू-तू मैं-मैं पर पहुंचकर तलाक तक पहुंच गई। जज समझदार था उसने मामले की तह में जाते हुए कहा कि आप बेटे को बुलाइए। बेटा क्या बनना चाहता है? तो पति-पत्नी दोनों एक साथ बोले कि अभी बेटा हुआ ही कहां है? जज के सामने उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

हठाग्रही प्रवत्ति को रोकें

मुनि श्री ने कहा कि बात हंसने की नही आप लोगों की हठाग्रही प्रवत्ति के कारण  छोटी-छोटी बातों पर ही उलझ पड़ते है, जिनका कोई सिर पैर नहीं होता कभी बच्चों की डिरेस को लेकर तो कभी अन्य छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के सामने ही माता-पिता आपस में उलझ पड़ते हैं। मुनिश्री ने कहा कि हठाग्रही नहीं बनिए। खुद को मनाना सीखिये। मन में खिन्नता मत लाइए। अपनी बात को इस प्रकार से रखो कि सामने वाला मान जाए तो ठीक नहीं माने तो ठीक। अपनी बात को थोपिये मत।

धर्म के मर्म को समझिए

मुनिश्री ने कहा कि मैं रोज आपको कहता हूं, आप लोग हमारी बात को सुनते ही नहीं फिर भी हम कर्तव्य मानकर कहते रहते हैं। आप लोग मान जाओ तो ठीक और नहीं मानो तो ठीक। यदि हम अपने आग्रह में लग जाएंगे तो मन में क्षोभ और क्लेश भी उत्पन्न होगा। यही स्थिति समाज, परिवार रिश्तेदारी और मित्रों के बीच में उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा धर्म के मर्म को समझिए। अपने जीवन को ऐसा बनाओ कि वह सबमें रम सके। सबको अपना बना सके, यह तभी हो सकता है, जब हम अपनी बात पर अड़ना बंद कर देंगे। सास ने बहू से कुछ कहा और बहू ने बात नहीं मानी बस इसी बात को लेकर ही घर में अशांति का माहौल बन जाता है।

बच्चों पर जबरन बोझ न डालें

मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ने कहा कि आजकल कम पढे़ लोग सुख शांति से रहते है। ज्यादा पढ़े-लिखे लोग ज्यादा कन्फयूज हो रहे है। बच्चे पहले भी पढ़ते थे और 60 प्रतिशत अंक लाकर बच्चे तथा मां-बाप दोनों खुश रहते थे। अपना व्यापार कृषि आदि कर खुशी-खुशी पूरा परिवार एक साथ रहता था। आज 95 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी बच्चे रोते-रोते घर आते हैं। उसका कारण है कि बच्चों के ऊपर आपने टॉप करने की मानसिकता बना रखी है। थोड़े से कम नंबर आने पर ही वह डिप्रेशन के शिकार हो जाते है। उन्होंने कहा कि बेटा और बेटियों को पढ़ाई के साथ ही व्यव्हारिक ज्ञान भी दीजिए। जिससे उनके अंदर सहनशीलता आए। यदि वह 70 प्रतिशत या कम नंबर भी लाए तो उनका हौसला बढ़ाइये। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे।

श्रीफल भेंट कर मुनिश्री से आग्रह किया

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आज की धर्म सभा में छत्रपति नगर समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, विपुल बाझल, कमल जैन चैलेंजर, श्रुत जैन, वीरेंद्र जैन, राकेश नायक आदि समाज जन उपस्थित हुए और छत्रपति नगर में परम पुज्य मुनि संसघ का मंगल प्रवेश एवं नवनिर्मित मान स्तंभ में वेदी प्रतिष्ठा मुनिससंघ के सानिध्य में हो। यह पुनीत भावना के साथ श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि संसघ ने आहार चर्या के बाद दोपहर में डेढ़ बजे उदासीन आश्रम कंचनबाग की ओर प्रस्थान किया। सांयकाल पौने 6 से बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम एवं रात में गोकुल नगर के पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों एवं भगवान के माता-पिता की गोद भराई भी शुक्रवार को होगी। विश्राम यहीं पर होगा।

कनाड़िया रोड पर होगी मुनिश्री की अगवानी 

30 नवंबर शनिवार को मुनिसंघ प्रातःसाढे़ 6 बजे वैभवनगर की ओर प्रस्थान करेंगे। मंगल अगवानी साढ़े 7 बजे संविद नगर कनाडिया रोड़ पर की जाएगी। पंचकल्याणक महा महोत्सव समिति के संयोजक हर्ष तृप्ति जैन धर्मप्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक रानी डोसी, नवीन आनंद गोधा सहित समस्त पदाधिकारियों ने सकल दिगंबर जैन समाज से आग्रह किया है कि मुनिसंघ की मंगल अगवानी कर पुण्यलाभ अर्जित करें।

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