आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। इस दौरान यहां धर्मसभा में प्रवचनों के माध्यम से दिव्य वचनों से गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाएं धर्मलाभ उठा रही हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की यह खबर…
पथरिया। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास विरागोदय तीर्थ पथरिया में चल रहा है। इस दौरान यहां धर्मसभा में प्रवचनों के माध्यम से दिव्य वचनों से गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाएं धर्मलाभ उठा रही हैं। शुक्रवार को प्रवचन देते हुए आचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने विरागोदय तीर्थ में कहा कि -कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे लोग मिलते हैं, जो इतने करीब हो जाते हैं कि उनकी बातें, उनकी मौजूदगी, उनकी मुस्कान सबकुछ अपना सा लगता है। हम आँख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं लेकिन, जब वही इंसान धोखा देता है तो तकलीफ़ सिर्फ इस बात की नहीं होती कि उसने झूठ बोला या साथ छोड़ा। असली दर्द इस बात का होता है कि हमने उसे अपना माना था। हम सोचते हैं कि दुनिया गलत है लेकिन, दरअसल हमारी उम्मीदें, हमारी भावनाएं और हमारी नज़रें गलत साबित होती हैं।
साथियों, ये धोखा हमें तोड़ने के लिए नहीं होता, ये हमें सिखाने आता है कि आगे किसे कितना करीब आने देना है। हर ज़ख़्म कोई न कोई सबक देकर जाता है और ये ज़रूरी है क्योंकि, अगर हर रिश्ता सच्चा होता तो समझने की ज़रूरत ही नहीं होती कि “अपना कौन है?” याद रखिए धोखा कभी भी आपकी कीमत तय नहीं करता, बल्कि सामने वाले की औकात दिखाता है।इसलिए टूटिए मत। जो चला गया, वो सबक बनकर रह गया। अब आगे बढ़िए क्योंकि, जिन लोगों ने आपको धोखा दिया। उन्हें शायद इस बात का अंदाज़ा नहीं कि आपने उन्हें क्या दिया था। अब वक्त है अपनी पहचान बनाने का। क्योंकि जब आप अंदर से मजबूत होते हैं, तब कोई भी धोखा आपको गिरा नहीं सकता।आप हर बार उठते हैं और पहले से बेहतर इंसान बनकर निकलते हैं।













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