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अपेक्षा रखने में सहजता रखेंगे तो उससे आपके संबंध प्रगाढ़ बने रहेंगे - मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज : मुनिश्री का मंगल आगमन तुलसीनगर


तुलसीनगर दिगंबर जैन मंदिर में मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज की धर्मसभा हुई। इसमें उन्होंने अपने प्रवचन में उन्होंने जीवन  में अपेक्षा, उपेक्षा, अतिपेक्षा और अनपेक्षा के बारे में विस्तार से चर्चा की। उनके प्रबोधन को सुन जैन समाज गदगद होता रहा। इंदौर से पढ़िए यह खबर…


इंदौर। ‘जीवन में हम किसी न किसी से कुछ न कुछ अपेक्षा अवश्य रखते हैं, अपेक्षा मुक्त जीवन किसी का भी नहीं है। अपेक्षा रखना बुरा नहीं है लेकिन, उन अपेक्षाओं की पूर्ति न होने पर खुद को उपेक्षित महसूस न करें’। यह उदगार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने तुलसीनगर जैन मंदिर परिसर में व्यक्त किए। गुरुवार को तुलसीनगर में मुनिश्री ने अपनी मंगलमय देशना में चार बातें अपेक्षा, उपेक्षा, अतिपेक्षा तथा अनपेक्षा पर चर्चा करते हुए कहा कि संसार में सभी संबंध अपेक्षा पर टिके हैं। गुरु की शिष्य से, शिष्य की गुरु से, पिता की पुत्र से, पुत्र की पिता से, पति की पत्नी से, पत्नी की पति से यहां तक कि मित्र के संबंध भी अपेक्षा पर आधारित हैं। संसार में जिसके जितने भी संबंध हैं। सभी एक-दूसरे से अपेक्षा रखते हैं।

अपेक्षा में आग्रह न हो

अपेक्षा रखना अच्छी बात है, लेकिन उस अपेक्षा में किसी प्रकार का आग्रह मत रखो। मुनिश्री ने कहा कि यदि आपने आग्रह रखा और उस आग्रह की पूर्ति नहीं हुई तो पर मन आकुल-व्याकुल होगा और मन दुखी होगा मुनिश्री ने कहा कि अपेक्षा के साथ धैर्य रखना जरूरी है। किसी से अति अपेक्षा मत रखो

अपेक्षा पूरी न हो तो सोच बदलती है

अपेक्षा की पूर्ति न होने पर वह हमारी सोच को नकारात्मक बना देती है। उससे हमारा व्यवहार एकांगी बन जाता है और हमारी प्रतिक्रियाएं भी उस अनुसार हो जाती हैं। हमारे विचारों में शंका-कुशंका जन्म लेती हैं और हम अपने आपको उपेक्षित महसूस करते हैं। शंका कुशंका से हमारे संबंध खराब हो जाते हैं। जब वस्तुस्थिति का ज्ञान होता है तो पछतावा ही हमारे हाथ आता है। मुनिश्री ने कहा अपेक्षा रखने में सहजता रखोगे तो उससे आपके संबंध प्रगाढ़ बने रहेंगे। मान लीजिये। कोई व्यक्ति आपका कार्य नहीं कर पाया तो सहज रहें, हो सकता है उसकी कोई मजबूरी रही होगी। उसके प्रति नेगेटिव सोच मत लाइए।

बच्चों से भी अपेक्षाएं रखने लगे तो…

मुनि श्री ने कहा कि आजकल बड़ों की बात तो छोड़ो बच्चों से भी अपेक्षा रखने लगे हैं कि दूसरों के बच्चे अच्छे नंबर लाए तो मेरे बच्चे को भी उससे ज्यादा नंबर लाना चाहिए। उसके पति ने विवाह वर्षगांठ पर यह गिफ्ट दिया तो मुझे उससे बढ़कर मिलना चाहिए। उसके पास ऐसी गाड़ी है तो मेरे पास भी ऐसी गाड़ी होना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि जब हम दूसरों को खड़ा करके उस पर खुद चलना शुरु करते हैं तो खुद को भूल जाते हैं और जब हम खुद को भूलते हैं तो अपनी हस्ती और हैसियत को भूलना शुरु कर देते हैं और अपनी सीमाओं का उल्लंघन कर देते हैं। हमारे ऊपर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ता है।

किसी से भी अपेक्षा न रखें

मुनिश्री ने कहा कि जीवन में यह बात गांठ बांधकर रख लो हम किसी से अति अपेक्षा नहीं करेंगे और यदि अपेक्षा की है तो उसकी पूर्ति न होने पर अपने आपको कभी उपेक्षित महसूस नहीं करेंगे। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेग सागरजी महाराज, मुनिश्री संधान सागरजी महाराज सभी क्षुल्लक मंचासीन रहे।

रंगोली सजाई और मुनिश्री का किया पाद प्रक्षालन

धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिश्री का मंगल आगमन तुलसीनगर में हुआ तो जगह-जगह पर रंगोली बनाई गई थी एवं विभिन्न स्थानों पर मुनिश्री के पाद प्रक्षालन कर श्रद्धालु अभिभूत हो रहे थे।

इन्होंने लिया मांगलिक क्रियाओं में भाग

प्रातःकालीन धर्मसभा में दीप प्रज्जवलन एवं मांगलिक क्रियाओं को धर्मप्रभावना समिति के महामंत्री हर्ष जैन तथा कोषाध्यक्ष विजय पाटोदी सहित तुलसीनगर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष राजेंद्र जैन, अभिषेक जैन सहित अन्य पदाधिकारियों ने पूर्ण किया। संचालन ब्रह्मचारी नितिन भैया खुरई ने किया। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि शाम को शंका समाधान के बाद मुनिश्री का रात्रि विश्राम तुलसीनगर में रहेगा।

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