आर्यिका श्री विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री विनयश्री माताजी (ससंघ, 12 पिच्छी) के मंगलमय सान्निध्य में कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से हुआ। कोटा से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर…
कोटा। श्री दिगंबर जैन मंदिर समिति, महावीर नगर विस्तार योजना के तत्वावधान में आर्यिका श्री विभाश्री माताजी एवं आर्यिका श्री विनयश्री माताजी (ससंघ, 12 पिच्छी) के मंगलमय सान्निध्य में कल्पद्रुम महामंडल विधान का समापन श्रद्धा एवं भक्ति भाव से हुआ। मंत्री पारस लुंग्या ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत मंगलाष्टक, सहस्त्र नाम अभिषेक एवं शांतिधारा पूजन विधान हुआ। इसके बाद विश्वशांति महायज्ञ एवं मंडल विसर्जन की पावन प्रक्रिया आयोजित की गई। इसके बाद पांडाल से मंदिर तक भव्य श्रीजी शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रीजी पालकी में विराजमान थे। जिनके साथ बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं भक्ति भाव से चल रही थी। संपूर्ण मार्ग महावीर स्वामी के जयकारों से गूंज उठा। अध्यक्ष पवन ठोला ने बताया कि शोभायात्रा में महिलाएं गुलाबी रंग की साड़ियों में सुसज्जित होकर सिर पर कलश धारण किए, भक्ति नृत्य करते हुए आगे बढ़ती रहीं। श्रद्धालु नाचते-गाते जयकारे लगाते चल रहे थे। आर्यिका श्री विभाश्री माताजी ससंघ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान करती हुई शोभायात्रा के साथ चलती रहीं।
सम्यकदर्शन व्यक्ति को महान बनाता है
इस अवसर पर गणिनी आर्यिका श्री विभाश्री माताजी ने प्रवचन में कहा कि कल्पद्रुम महामंडल विधान का साक्षात फल तीर्थंकर बनना नहीं, बल्कि मनुष्य जीवन को सार्थक बनाना है। धर्म भगवान के लिए नहीं, अपितु समस्त जीवों के कल्याण के लिए है। धर्म हमें सही मार्ग दिखाता है और जीवन में सम्यकदर्शन की प्राप्ति कराता है। उन्होंने कहा कि सम्यकदर्शन व्यक्ति को महान बनाता है। जैसे छोटा-सा बीज यदि खाद-पानी पाए तो विशाल वृक्ष बनता है, उसी प्रकार विधान रूपी सम्यक बीज यदि प्रतिदिन अभिषेक, पूजा और आराधना रूपी पोषण पाए तो जीवन में आत्मिक उन्नति अवश्य होती है।
सरलता, करुणा को आत्मसात करना है
प्रतिदिन भगवान का अभिषेक-पूजन करने वाला व्यक्ति निरंतर प्रगति करता है और उसका जीवन व्यापार की भांति दिन-प्रतिदिन उन्नति की ओर बढ़ता है।गणिनी माताजी ने कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन में संयम, सरलता, करुणा और सदाचार को आत्मसात करना है। यदि वाणी और विचार शुद्ध हो जाएं तो वहीं से कल्याण का मार्ग प्रारंभ हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान की आराधना करते समय यदि कोई परेशानी आए तो उसे सम्यक समाधान भाव से स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि देव-शास्त्र-गुरु की अवहेलना कभी नहीं होनी चाहिए।
इंद्रियों ने भक्ति नृत्य किए
महामंत्री पारस लुंग्या ने बताया कि कार्यक्रम में उपाध्यक्ष मुकेश जैन, विनोद सकुनिया, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश, मनोज कोटिया, संजय बाजल शिखर ठग, प्रमोद ठग, अनुराग जैन, मनोज कोटिया, प्रकाश पाटनी, ललित लुंग्या, मुकेश सांवला उपस्थित रहे। संपूर्ण विधान पंडित जितेन्द्र जैन शास्त्री कोटा के सफल निर्देशन में हुआ। संगीतकार पुष्पेंद्र जैन एंड पार्टी के संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर इंद्र इंद्रियों ने खूब भक्ति नृत्य किए।













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