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मनुष्य जीवन चिंतामणि रत्न के समान कीमती : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में दी देशना


आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 27 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद ससंघ 36 पिच्छी की चरण रज से धर्म नगरी झांतला में मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ।आचार्य संघ का सिंगोली होते हुए अतिशय क्षेत्र बिजौलिया राजस्थान की ओर मंगल विहार चल रहा हैं। झांतला से राजेश पंचोलिया की यह खबर…


झांतला (सिंगोली)। तीर्थंकर, जिनवाणी की देशना यही है कि आप धर्म पूर्वक अर्थ पुरुषार्थ करें। तभी मोक्ष पुरुषार्थ का ध्येय प्राप्त होगा। भगवान की भक्ति सच्चे मन से करने पर जन्म मरण आवागमन रूपी दु:ख दूर होते हैं, उससे छुटकारा मिलता है। मनुष्य जीवन बहुत कीमती है। आत्महत्या करना गलत है, विद्यार्थी कम नंबर आने से आत्महत्या करते हैं। मनुष्य जीवन चिंतामणि रन के समान कीमती है। आत्महत्या करने से जीवन छोटा होता है। यह उद्बोधन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने यहां धर्म सभा में दिए। आचार्य श्री ने आगे बताया कि इसी प्रकार गर्भपात कराना भी गलत है। जैन धर्म में इसे श्रेष्ठ नहीं माना गया है। इसलिए आपको मनुष्य जीवन में धर्म और अधर्म को समझना चाहिए। अकाल मृत्यु होती नहीं है। पिछले जन्म के कारण अल्प आयु मिलती है।

यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नगर प्रवेश पर आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 27 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद ससंघ 36 पिच्छी की चरण रज से धर्म नगरी झांतला में मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ।आचार्य संघ का सिंगोली होते हुए अतिशय क्षेत्र बिजौलिया राजस्थान की ओर मंगल विहार चल रहा हैं। सकल दिगम्बर जैन समाज झांतला के अध्यक्ष माणक जैन एवं अंकुश ने बताया कि आचार्य श्री के आगमन पर शोभायात्रा में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती की। सभी उम्र के भक्त नृत्य कर भक्ति प्रदर्शित कर रहे थे। नगर के दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दर्शन किए। आपके सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा हुई।

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Shreephal Jain News

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