अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने शनिवार को श्री दिगंबर 1008 शांतिनाथ मंदिर, गोयल नगर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों में आपने धन का उपयोग मंदिर, धार्मिक स्थल बनाने में किया तो आज हमें श्रवणबेलगोला के मंदिर, शिखर जी, महावीर जी, कुंडलपुर, हस्तिनापुर जैसे भव्य तीर्थ क्षेत्रों के दर्शन करने को मिल रहे हैं। पढ़िए रेखा संजय जैन की विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने शनिवार को श्री दिगंबर 1008 शांतिनाथ मंदिर, गोयल नगर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों में आपने धन का उपयोग मंदिर, धार्मिक स्थल बनाने में किया तो आज हमें श्रवणबेलगोला के मंदिर, शिखर जी, महावीर जी, कुंडलपुर, हस्तिनापुर जैसे भव्य तीर्थ क्षेत्रों के दर्शन करने को मिल रहे हैं। इसी सब जैन धर्म का इतिहास जाना जा रहा है। धर्म के क्षेत्र पैसा लगाने से संस्कार, संस्कृति सुरक्षित रहती है। उन्होंने कहा कि जिनका पैसा धर्म न उपयोग होकर भोगों के साधनों में लगता है, उनके घर में से धर्म नाश हो जाता है। आज जो घरों में रोग, शोक, दुख दिखाई दे रहा है, उसका कारण है कि उनका पैसा धर्म की अप्रभावना में लग रहा है।
आज हम चामुण्डराय, राजा खारवेला को याद करते हैं, उसके पीछे कारण भी यही है कि उन्होंने धर्म स्थलों का निर्माण कर समाज को सम्यगदर्शन को प्राप्त करने के स्थान बनाए और स्वयं की आत्मा का कल्याण भी किया। शास्त्रों में कहा है कि गृहस्थ को अपनी कमाई का कम से के 15 प्रतिशत दान करना चाहिए, तभी उसके मोक्ष मार्ग का रास्ता खुलता है। मुनि श्री ने अपने प्रवचन में भगवान बाहुबली श्रवणबेलगोला की प्रतिमा की बनाने की कहानी सुनाई और दान का महत्व बताया।
ये कार्यक्रम भी हुए
राजेश जैन में बताया कि इससे पहले धर्म सभा में मुनि के पाद पक्षालन अरविंद संतोष जैन (महावीर डेरी) ने किया। शास्त्र भेंट राजेंद्र शशि सोनी, प्रमिला जैन ने किया । सामाजिक संसद के उपाध्यक्ष कुशलराज जैन ने पूज्य वर्षायोग के बैनर का विमोचन किया। धर्म सभा का संचालन अध्यक्ष दिलीप पाटनी द्वारा किया गया।













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