यहां के एकमात्र तीर्थस्थल श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र लाल मन्दिर में होने जा रहे प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज ‘छाणी’ परंपरा के प्रमुख संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज एवं गणिनी आर्यिका श्री 105 चन्द्रमती माताजी के मंगल चातुर्मास हेतु भव्य कलश स्थापना समारोह का ऐतिहासिक आयोजन व्यापक धर्मप्रभावना के साथ इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के प्रांगण में सानंद संपन्न हुआ। पढ़िए समीर जैन की रिपोर्ट…
दिल्ली। यहां के एकमात्र तीर्थस्थल श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र लाल मन्दिर में होने जा रहे प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शान्ति सागर जी महाराज ‘छाणी’ परंपरा के प्रमुख संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज एवं गणिनी आर्यिका श्री 105 चन्द्रमती माताजी के मंगल चातुर्मास हेतु भव्य कलश स्थापना समारोह का ऐतिहासिक आयोजन व्यापक धर्मप्रभावना के साथ इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के प्रांगण में सानंद संपन्न हुआ। समाज के सौभाग्यशाली महानुभावों द्वारा ध्वजारोहण, मंगलाचरण, चित्र अनावरण, जिनवाणी विराजमान, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट व पाद-प्रक्षालन आदि मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुईं| मंच संचालन ब्र. राजकिंग भैया द्वारा किया गया। भट्टारक श्री सुरेन्द्र कीर्ति स्वामी तथा बा. ब्र. जय निशांत भैया ने पधारकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम के मध्य महिलाओं व बच्चों ने अनेकों प्रेरक व मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिन्हें उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से खूब सराहा। गुरुभक्तों द्वारा आचार्य श्री की अष्ट-द्रव्य के सुसज्जित थाल द्वारा विशेष पूजन किया गया। चातुर्मास मुख्य कलश स्थापित करने का परम सौभाग्य पुष्पा जैन सपरिवार (मॉडल टाउन), प्रमोद जैन सपरिवार ‘महावीरा’ (अशोक विहार) तथा नितिन जैन सपरिवार (विवेक विहार) को प्राप्त हुआ। अन्य सौभाग्यशाली महानुभावों ने विशेष चातुर्मास कलश स्थापित कर पुण्यार्जन किया।

यह चातुर्मास केवल एक क्षेत्र का नहीं है
भक्तों को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि यह चातुर्मास केवल एक क्षेत्र का नहीं है, अपितु पूरे दिल्ली-एनसीआर का संयुक्त चातुर्मास है। इस अवसर पर आचार्य श्री का पिच्छी व कमण्डलु परिवर्तन भी संपन्न हुआ। आचार्य श्री की पुरानी पिच्छी लेने का सौभाग्य श्री अरुण जैन सपरिवार, कोसी कलां को प्राप्त हुआ। विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री के कहा कि चातुर्मास बाह्य यात्रा को विराम देकर अंतरंग की यात्रा को गति प्रदान करने का स्वर्णिम अवसर होता है।
चातुर्मास का अवसर जीवन को सन्मार्ग की ओर ले जाने का माध्यम है। संत तो एक स्थान पर रूककर तथा साधना कर अपने कर्मों की निर्जरा कर लेता है, परन्तु श्रावकों को भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए घर से निकल संत की चरण-सन्निधि में आना ही होगा। आर्यिका श्री ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए चातुर्मास काल में धर्म ध्यान आदि मांगलिक कार्यों में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित किया।
इस भव्य समारोह में राजधानी दिल्ली की विभिन्न कालोनियों के साथ-साथ गाज़ियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, बागपत, अलवर, तिजारा, कोसी कलां, बड़ौत, शामली, बागपत, रेवाड़ी, गुरुग्राम आदि जगह-जगह से पधारे हजारों मुनिभक्तों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में सम्मिलित समस्त श्रद्धालुओं को आयोजन समिति द्वारा चांदी का सिक्का भेंट स्वरूप प्रदान किया गया।













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