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डॉ. पन्नालाल पापड़ीवाल ने किया स्वर्ग प्रयाण : विख्यात समाजसेवी और प्रखर व्यक्तित्व के रूप में थी पहचान


मांगीतुंगी में 108 फीट की भगवान ऋषभदेव की मूर्ति निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. पन्नालाल बालचंद पापड़ीवाल (91) का 7 फरवरी को देहावसान हो गया। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए। वे विभिन्न समितियों के अध्यक्ष, पार्षद और विख्यात समाजसेवी रहे। पढ़िए छत्रपति संभाजीनगर से अभिषेक पाटील की खबर….


छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र )। मांगीतुंगी में 108 फीट की भगवान ऋषभदेव की मूर्ति निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. पन्नालाल बालचंद पापड़ीवाल (91) ने 7 फरवरी को सुबह करीब 11 बजे स्वर्ग के लिए प्रयाण किया। उन्होंने आदिवासी क्षेत्र मांगीतुंगी में अपने जीवन के 20 वर्ष बिताकर भगवान ऋषभदेव की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवाने का असंभव कार्य पूरा कर दिखाया। यह उपलब्धि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज की गई है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, तीन बेटियां और नाती-पोतों का परिवार छोड़ गए हैं।

पशु-पक्षियों की बलि रोकने का किया उत्तम कार्य

डॉ. पापड़ीवाल महाराष्ट्र पशु एवं पक्षी बलि प्रतिबंधक समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने 1990 से 1995 के बीच मांगीर बाबा यात्रा, चिवरी यात्रा आदि कई स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाकर भक्तों को पशु-पक्षियों की बलि से रोकने का कार्य किया। लगातार 27 वर्षों तक दिगंबर जैन तीर्थयात्रा समिति, महाराष्ट्र के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जैन समुदाय की विभिन्न समितियों में लंबे समय तक भूमिका निभाई।

नपा में समिति अध्यक्ष और पार्षद रहे

डॉ. पापड़ीवाल पैठण नगरपालिका की विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और लगातार 27 वर्षों तक पार्षद रहे। वह पैठण में प्रतिष्ठान कॉलेज के संस्थापक सचिव थे। उन्होंने राजस्थान युवा परिषद के अध्यक्ष का पद भी संभाला। उन्होंने पैठण जैन तीर्थ स्थल पर विभिन्न पदों पर 60 वर्षों तक काम किया।

अंतिम संस्कार अयोध्यानगरी श्मशान घाट पर हुआ

उनकी अंतिम यात्रा शाम चार बजे आर्यनंदी कालोनी, वेदांत नगर स्टेशन रोड से रवाना हुई। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार अयोध्या नगरी श्मशान घाट पर किया गया। इस अवसर पर राजनीतिक, धार्मिक, व्यापारिक, सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों नागरिक उपस्थित थे।

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