जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 13 फरवरी को पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाएगा। दिगंबर जैन मंदिरों में फाल्गुन कृष्ण एकादशी को भगवान आदिनाथ जी के ज्ञान कल्याणक पर विशेषतौर पर आराधना, शांतिधारा, अभिषेक, देव-शास्त्र-गुरु पूजन सहित अर्घ्य समर्पण आदि मंगल विधान पूर्व समर्पण भाव से किए जाएंगे। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति…
इंदौर। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 13 फरवरी को पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाएगा। दिगंबर जैन मंदिरों में फाल्गुन कृष्ण एकादशी को भगवान आदिनाथ जी के ज्ञान कल्याणक पर विशेषतौर पर आराधना, शांतिधारा, अभिषेक, देव-शास्त्र-गुरु पूजन सहित अर्घ्य समर्पण आदि मंगल विधान पूर्व समर्पण भाव से किए जाएंगे। इस दिन मंदिरों में दिगंबर जैन समाजजनों की उपस्थिति और भगवान आदिनाथ की भक्ति का अद्भुत नजारा देखने में आएगा। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जी का ज्ञान कल्याणक का विशेष महत्व और इसके संदेश दिशा-दर्शन करने वाले हैं। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का ज्ञान कल्याणक 13 फरवरी (शुक्रवार) को मनाया जा रहा है। फाल्गुन कृष्ण एकादशी को केवलज्ञान कल्याणक के रूप में मनाया जाता है, जो उस पवित्र क्षण का प्रतीक है जब प्रभु को केवलज्ञान (पूर्ण ज्ञान) की प्राप्ति हुई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें प्रयागराज के अक्षय वट (पुरिमताल) के नीचे केवलज्ञान प्राप्त हुआ था। इसी दिन 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का जन्म और तप कल्याणक भी मनाया जाता है। श्रीफल जैन न्यूज और समाजजनों की ओर से विनम्र अपील है कि इस अवसर पर स्थानीय जैन मंदिरों में होने वाली शांतिधारा और विशेष पूजा-अर्चना में भाग ले सकते हैं।













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