ललितपुर में आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज, समय सागर महाराज एवं आर्यिका ज्ञानमती माताजी के अवतरण दिवस पर गुरु उपकार को याद करते हुए आचार्य निर्भयसागर महाराज ने कहा कि उनके उपकार अतुलनीय हैं। दीप प्रज्ज्वलन, पादप्रक्षालन, संगीतमय पूजन और हस्तलिखित पुस्तक विमोचन सहित महिला मंडलों, बच्चों और साधर्मी बंधुओं की भागीदारी से कार्यक्रम संपन्न हुआ। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
ललितपुर। जन्म लेने के उपरांत यदि जीव अपने जीवन में चारित्र धारण कर ले तो उसका जीवन सार्थक बन जाता है। गुरु के जीवन को धन्य बताते हुए वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति संसार में जन्म से नहीं, कर्म से महान बनता है। अच्छे कर्म ही जीवन की सार्थकता तय करते हैं। संत शिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर महाराज के जीवन को आदर्श बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके त्याग और तपस्या से हजारों लोगों ने आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया।
जैन अटामंदिर में दिगंबर जैन समाज पंचायत समिति के तत्वावधान में आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज के ससंघ सानिध्य में दीप प्रज्ज्वलन, पादप्रक्षालन एवं संगीतमय पूजन संपन्न हुआ। मंगलाचरण संघस्थ ब्रह्मचारिणी लवली दीदी द्वारा गुरु चरणों में किया गया। कार्यक्रम में महिला मंडल, ब्राह्मी सुन्दरी, जैन एकता संघ, विद्या गुरु जैन मिलन, प्रतिभास्थली मंडल, चंद्रप्रभु मंडल, सुधा कलश भक्ताम्मर मंडल और पाठशाला परिवार ने भक्ति पूर्वक संगीतमय पूजन किया।
“डूबो मत डुबकी लगाओ” का विमोचन
इस अवसर पर आचार्य श्रेष्ठ विद्यासागर द्वारा हस्तलिखित पुस्तक “डूबो मत डुबकी लगाओ” का विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, संजीव जैन, राजीव जैन, लकी परिवार और अन्य समाजजन उपस्थित रहे। आचार्य श्री का गुणानुवाद जैन पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, नीलम सराफ और पं. शीतल चंद जैन ने किया। सायंकाल आरती के उपरान्त पाठशाला परिवार ने बच्चों की प्रस्तुति के माध्यम से आचार्य श्री को विन्यांजलि अर्पित की। प्रातःकालीन बेला में नगर के जैन मंदिरों में श्रावकों ने आचार्य श्री की पूजा कर गुरू को नमन किया। इस प्रकार, शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे नगर का वातावरण गुरु चरणों के स्मरण, सेवा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित रहा।













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