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गुरु शिष्य सम्मान कार्यक्रम का हुआ आयोजन : जैन मुनि निरंजन सागर ने बच्चों को पढ़ाया पाठ 


सकल दिगंबर जैन समाज जैतहरी के तत्वाधान में “गुरु शिष्य सम्मान” कार्यक्रम का अयोजन किया गया। इसके पुण्यार्जन का लाभ प्रिंस जैन दिल्ली वालों ने प्राप्त किया। इस कार्यक्रम में 600 से अधिक बच्चों ने मुनिश्री की वाणी को शालीनता पूर्वक सुना और उनके वचनों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। पढ़िए राजेश जैन रागी और रत्नेश जैन बकस्वाहा की रिपोर्ट। 


जैतहरी। जैतहरी तहसील मुख्यालय पर जैन मुनि निरंजन सागर महाराज की शीतकालीन वाचना के लिए विराजमान हैं। सरस्वती शिशु मन्दिर जैतहरी में मुनि श्री निरंजन सागर के सानिध्य में एवं सकल दिगंबर जैन समाज जैतहरी के तत्वाधान में “गुरु शिष्य सम्मान” कार्यक्रम का अयोजन किया गया। इसके पुण्यार्जन का लाभ प्रिंस जैन दिल्ली वालों ने प्राप्त किया। इस कार्यक्रम में 600 से अधिक बच्चों ने मुनिश्री की वाणी को शालीनता पूर्वक सुना और उनके वचनों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया । मुनि श्री ने प्रवचन की शुरुवात में गुरु का महत्व बताते हुए बच्चों को जीवन के तमाम पहलुओं में नैतिक शिक्षा के संस्कार दिए और मांसाहार न कर शाकाहार को बढ़ाने पर बल दिया और बच्चों को जीवन के लक्ष्यों को जानने और पूरा करने की बात भी कही। साथ ही गुरु देव ने महाराणा प्रताप, भगत सिंह, लक्ष्मी बाई जैसे वीर बलिदानियों का उल्लेख करते हुए बच्चों को मातृ भूमि और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को याद दिलाते हुए उन्हे राष्ट्र के लिए किसी भी स्थिति में हमेशा डटकर आगे आने के लिए भी प्रेरित किया। साथ ही बच्चों को जीवन की किसी भी परिस्थिति पढ़ाई, परीक्षा और किसी भी अन्य प्रति स्पर्धा के दबाव में आकर आत्महत्या न करने एवं प्रत्येक परिस्थिति का पूरे हौंसले से डटकर सामना करने के लिए विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया।

बच्चे देश का भविष्य उन्हें सुधारना जरुरी 

मुनि श्री ने कहा कि बच्चे ही देश के भविष्य हैं, आज का वर्तमान ही कल का भविष्य होता है , इसलिए वर्तमान को सुधारना परम आवश्यक है। मुनि श्री ने परीक्षा पद्धति के बारे बच्चों को विस्तार से बताया और परीक्षा का डटकर सामना करना और जीवन की प्रत्येक परीक्षा को भेदने के लिए एकलव्य का उदाहरण देते हुए बच्चों में आत्मविश्वास को बढ़ाया। उन्होंने कहा की हमेशा सकारात्मक सोच रखो। मुनिश्री ने विद्यालय प्रबंधन को बच्चों के कैरियर के इच्छित विषय को बढ़ावा देते हुए उन्हे स्वर्णिम भविष्य के लिए संबंधित स्थानों पर भ्रमण कराने की व्यवस्था बनाने के लिए निर्देश दिए। शिक्षकों को समाज का एक महत्त्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए “आचार्य सम्मान” कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी कही । सभी बच्चो को विद्यार्थी जीवन की अमूल्य वस्तुएं देकर मुनिश्री ने पुरुस्कृत भी किया।

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