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गुरु ऐसा होता है जहां से खुलता है मोक्ष का रास्ता : आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी ने बताई पूर्णिमा पर गुरु की महिमा 


आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। इस बेला में सर्वप्रथम मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। जिनसहस्त्र नाम अभिषेक भी किया गया। प्रवचन सभागार में भक्ति उल्लास एवं आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा पर्व आचार्य श्री संघ सानिध्य में मनाया गया। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाडिया की यह खबर…


रामगंजमंडी। आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज संघ सानिध्य में गुरु पूर्णिमा पर्व मनाया गया। इस बेला में सर्वप्रथम मूलनायक श्री शांतिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। जिनसहस्त्र नाम अभिषेक भी किया गया। प्रवचन सभागार में भक्ति उल्लास एवं आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा पर्व आचार्य श्री संघ सानिध्य में मनाया गया। जिसका निर्देशन मुनि श्री प्रांजल सागर महाराज ने किया। चातुर्मास व्यवस्था समिति की सांस्कृतिक समिति ने विशेष मांडना बनाया। विशेष अष्ट द्रव्य थाल सजाए। इसके साथ ही भक्ति भाव के साथ झूमते हुए गुरुदेव का पूजन किया। सर्वप्रथम मूलनायक शांतिनाथ भगवान को अर्घ्य समर्पित किया। इसके उपरांत आचार्य श्री विराग सागर महाराज को अर्घ्य समर्पित किया। इस अवसर भक्ति उल्लास देखते ही बनता था। पूजन से पूर्व प्रीति दीदी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। जब पूजन हो रहा था सभी आस्था उल्लास उमंग से परिपूर्ण थे। इसी क्रम में बालिकाओं ने गुरु गुणानुवाद करते हुए नृत्य की प्रस्तुति देते हुए मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। आचार्य श्री के चरणों के पद प्रक्षालन का सौभाग्य अजीतकुमार राजेश कुमार सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चातुर्मास व्यवस्था समिति की सांस्कृतिक समिति की ओर से पूजा सिंघल, खुशी विनायका, रेखा शाह, विभा रावका, मेघा चेलावत, साधना पहाड़िया, सोनिया बागडीया, विजया सांवला आदि को प्राप्त हुआ।

सही दिशा में चलाने का काम गुरु का होता है

धर्म सभा में सर्वप्रथम मुनि श्री प्रांजल सागरजी ने कहा कि मेरे लिए आज विशेष दिन है। आज का दिन भावांजलि का होता है। गुरु के विषय में कहा कि गुरु ज्ञान ध्यान से परिपूर्ण होते हैं। सबको एक गुरु बनाना चाहिए, गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं। इस अवसर पर आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि गुरु द्वारा ही मोक्ष का रास्ता खुलता है। संपूर्ण विश्व में दिगंबर गुरु ऐसा होता है जो मोक्ष मार्ग देने में समर्थ होता है। महाराज श्री ने कहा कि जैन दर्शन अकड़ने की नहीं झुक कर चलना सिखाता है। मोक्ष का रास्ता छोटा होता है। इसीलिए हमें झुकना तो पड़ेगा ही। जीवन में गुरु जरूरी है। बुद्धि दिमाग गुरु के बिना नहीं चलता। सही दिशा में चलाने का काम गुरु का होता है।

असफलता पुरुषार्थ देकर जाती है

आचार्यश्री ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि पहली बार गुरुवर से मिला तो स्वाध्याय करना स्वीकार किया बैठ गया लेकिन समझ में नहीं आता था गुरुदेव ने मुझसे कहा की समझने की कोशिश करना और कहा कि यह तुम्हारे हित में है अपने आप को समझोगे तो स्वाध्याय समझ आ जाएगा। और मार्ग तुम्हें मंजिल देगा। उन्होंने रामगंजमंडी के लोगों को कहा रामगंजमंडी वालों हमारी मानसिकता गुरु के साथ जुड़ी रहनी चाहिए। असफलता से कभी घबराना मत असफलता पुरुषार्थ देकर जाती है। काम करने की सीख देकर जाती है लगन देकर जाती है। निस्वार्थ भाव से गुरु से जुड़ना तो समझ आएगा गुरु होते क्या है दिगंबर मुनि से बड़ा कोई पद नहीं। गुरु की महिमा होती है उपकार होता है गुरु के दिमाग में होता है की शिष्य भटक नहीं जाए मार्ग से च्युत न हो जाए। गुरु वही होता है जो निस्वार्थ होता है निष्कलंक होता हैं। प्रवचन सभा में श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर श्री संघ अध्यक्ष राजकुमार पारख ने आकर आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि श्वेतांबर मूर्तिपूजक समाज से ज्यादा कई गुना ज्यादा संतांे के प्रति सच्ची निष्ठा रखने वाला दिगंबर जैन समाज है। मुझे कोई ग्लानि नहीं है। उन्होंने गुरु के प्रति शिष्य के समर्पण को बताते हुए एकलव्य और अर्जुन का उदाहरण दिया।

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