गुप्तिसदन स्थित श्री 1008 आदिनाथ जिनालय में 14 से 16 नवंबर तक त्रिदिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत शुक्रवार सुबह आर्यिका 105 श्री यशस्विनी माताजी ससंघ के मंगल प्रवेश से हुई। महिला संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन, प्रवचन, सम्मान और कई धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। पढ़िए इंदौर से रेखा जैन की रिपोर्ट
इंदौर। गुप्तिसदन स्थित श्री 1008 आदिनाथ जिनालय में तीन दिन तक चलने वाले भव्य धार्मिक उत्सव का शुभारंभ शुक्रवार 14 नवंबर को सुबह 7 बजे हुआ। शुरुआत गणिनी आर्यिका 105 श्री यशस्विनी माताजी ससंघ के मंगल प्रवेश से हुई। इसके बाद भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और पूज्य माताजी के प्रेरक प्रवचन संपन्न हुए।
दिगंबर जैन महिला संगठन का राष्ट्रीय सम्मेलन
दोपहर 2 बजे दिगंबर जैन महिला संगठन द्वारा राष्ट्रीय महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सुमन जैन ने की, वहीं 105 आर्यिका श्री यशस्विनी माताजी ससंघ का सानिध्य सबको प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलन से हुई। महिला मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन जैन, इंदौर अध्यक्ष रेखा पतंग्या और संयोजक उषा पाटनी का स्वागत-अभिनंदन किया गया। अनीता जैन ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
संगठन की उपलब्धियाँ और विस्तार
राष्ट्रीय अध्यक्ष सुमन जैन ने बताया कि 38 वर्ष पहले इंदौर से 25 महिला समूहों के साथ शुरू हुआ यह संगठन आज 55 महिला समूहों और 25 यंग बहु समूहों तक पहुँच चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 200 इकाइयाँ सक्रिय हैं।
इस अवसर पर इंदौर मंदिरों की निर्देशिका और ज्ञानमती माताजी के आशीर्वाद से प्रारंभ हुई विशेष पत्रिका को माताजी को भेंट किया गया।
संगठन की गतिविधियाँ और सेवाएँ
इंदौर अध्यक्ष रेखा पतंग्या ने संगठन के सामाजिक और धार्मिक कार्यों की जानकारी दी—
पूजा, विधान और बच्चों के शिविर
पॉलिथीन के स्थान पर कपड़े की थैलियों का प्रचार
बड़े संघों के आगमन पर ‘संगठन चौका’
जैन मंदिरों के पुजारी और व्यासजी का सम्मान
छःढाला प्रशिक्षण और अध्यायवार परीक्षा
दीपावली पर ‘साथी हाथ बढ़ाना’ प्रकल्प
जरूरतमंदों की बीमारी के इलाज में आर्थिक सहायता
आर्यिका श्री यशस्विनी माताजी का ओजस्वी प्रवचन
माताजी ने कहा—
“तीर्थंकरों की खान और मुनियों की शान बनी रहनी चाहिए।”
“जिस देश की संस्कृति व्यवस्थित नहीं होती, उसका उद्धार भी नहीं होता।”
“मंदिर में दर्शन करें तो मूर्ति का इतिहास जानना चाहिए—किस भगवान की है, कब बनी, किसने प्रतिष्ठित की।”
“पहले अपने परिवार को उन्नत करें, फिर आसपास के जैन बंधुओं को ऊपर उठाने का प्रयास करें।”
सम्मान समारोह और बाल कार्यक्रम
शाम के सत्र में ज्ञान वर्धिनी पाठशाला के बच्चों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों का सम्मान किया गया।
आने वाले कार्यक्रम
15 नवंबर को सुबह आदिनाथ भगवान का अभिषेक, शांतिधारा का आयोजन होगा। रात्रि में डिजिटल अंताक्षरी का कार्यक्रम रखा गया है।
16 नवंबर को सुबह गणधर वलय विधान , दोपहर 2 बजे विद्वत सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन उषा पाटनी ने किया।













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