सनावद में विराजमान अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज ने विहार किया। उनका मंगल प्रवेश बेड़िया में हुआ। यहां समाजजनों ने उनकी भव्य अगवानी की। बेड़िया में मुनिश्री ने धर्मसभा में प्रवचन दिए। इसमें धर्म से विलग होने को चिंतनीय बताया। बेड़िया से पढ़िए, यह खबर…
बेड़िया। भीषण तपाने वाली गर्मी में जैन साधुओं का नंगे पांव पद विहार करना एक बहुत बड़ी तप साधना होती है। जैन समाज के कल्याण जैन एवं धीरेंद्र घाटे ने बताया कि समीपस्थ नगर पीपलगोन में जन्मे चक्रेश जैन ने अपना गृहस्थ जीवन त्यागकर धर्म के मार्ग को अंगीकार किया और बन गए मुनिश्री पूज्यसागरजी महाराज। समाज के अपूर्व धनोते एवं आयुष मानोरिया ने बताया कि प्रातःकाल की बेला में मुनि श्री की मंगल अगवानी एस्सार पंप से जैन समाज द्वारा की गई। दीक्षा उपरांत 10 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद मुनिश्री के आगमन पर नगर वासियों ने पाद प्रक्षालन कर अपने आप को धन्य महसूस किया।
बैंडबाजों के साथ मुनिश्री के जयकारों के बीच समाज जनों ने पलक पांवड़े बिछाकर अगवानी की। मुनि श्री ने स्वाध्याय हाल में प्रवचन माला में बताया कि संतों का समागम बड़े पुण्य से प्राप्त होता है। वर्तमान में अधिकांश लोग धन के चक्कर में धर्म से दूर होते जा रहे हैं।
जो कि एक चिंतनीय विषय है। ज्ञात रहे जैन साधु 24 घंटे में एक बार ही आहार जल आदि लेते हैं। आज की आहार चर्या दीप्ति दीपक जटाले परिवार के यहां हुई।













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