सर्वोदय पाठशाला द्वारा श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर जिनवाणी मां की आराधना की गई। पूज्य क्षुल्लिका अक्षतमति माताजी एवं क्षुल्लिका क्षयोपसम माताजी के पावन सान्निध्य में मां जिनवाणी को चांदी की पालकी में विराजमान कर ढोल एवं तांसों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में जैन बंधु, माताएं, बहिनें एवं बच्चे अपने अपने सिर पर जिनवाणी लेकर चल रहे थे। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…
मुरैना। श्रुत पंचमी महापर्व के पावन अवसर पर भव्य एक जिनवाणी शोभा यात्रा निकाली गई। बड़े जैन मंदिर मुरैना में श्रुत पंचमी पर्व विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्राचार्य अनिल जैन ने बताया कि प्रतिवर्ष ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। जैन परम्परा के अनुसार श्रुत पंचमी पर्व ज्ञान की आराधना का महा पर्व है, जो जैन भाई बंधुओं को वीतरागी संतों की वाणी सुनने, आराधना करने और प्रभावना करने का संदेश देता है। जैन मतानुसार श्रुत पंचमी को जिनवाणी के उद्गम के रूप में देखा जाता है।
सिर पर लेकर चल रहे थे जिनवाणी
इस मौके पर सर्वोदय पाठशाला द्वारा श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर जिनवाणी मां की आराधना की गई। पूज्य क्षुल्लिका अक्षतमति माताजी एवं क्षुल्लिका क्षयोपसम माताजी के पावन सान्निध्य में मां जिनवाणी को चांदी की पालकी में विराजमान कर ढोल एवं तांसों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर गोपीनाथ की पुलिया, पीपल वाली माता, रुई की मंडी, सदर बाजार, लोहिया बाजार होती हुई जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में जैन बंधु, माताएं, बहिनें एवं बच्चे अपने अपने सिर पर जिनवाणी लेकर चल रहे थे। सभी लोग एक विशेष परिधान में दिखाई दे रहे थे। युवा साथी हाथों में पचरंगी ध्वजा लेकर चलायमान थे। सभी जन जिनेंद्र प्रभु एवम मां जिनवाणी की जय जयकार करते हुए जैन धर्म की प्रभावना कारक नारे लगा रहे थे।
शोभा यात्रा के पश्चात मां जिनवाणी की पूजा-अर्चना की गई एवं श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इससे एक दिन पूर्व जिनवाणी सजाओ प्रतियोगिता रखी गई। जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर मौजूद दोनों क्षुल्लिका माताजियों को शास्त्र भेंट किए गए। कार्यक्रम का निर्देशन पूर्व प्राचार्य महेंद्र कुमार शास्त्री, प्राचार्य चक्रेश शास्त्री एवं सफल संचालन विद्वत नवनीत जैन शास्त्री द्वारा किया गया ।













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