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श्रुत आराधना महोत्सव में भव्य शोभायात्रा रविवार को: देव शास्त्र गुरु की शोभायात्रा में 111 रथ होंगे शामिल 


पंच बालयति मंदिर विजयनगर में चल रही श्रुत आराधना महोत्सव 2025 के तहत नित धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। इसमें रविवार को देव शास्त्र गुरु की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें 111 रथ शामिल रहेंगे। साथ ही मुनिश्री निष्पक्षसागर जी महाराज और मुनिश्री निष्प्रहसागरजी महाराज का सानिध्य भी प्राप्त होगा। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। पंच बालयति मंदिर विजयनगर में चल रही श्रुत आराधना महोत्सव 2025 के तहत नित धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। इसमें रविवार को देव शास्त्र गुरु की शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसमें 111 रथ शामिल रहेंगे। साथ ही मुनिश्री निष्पक्षसागर जी और मुनिश्री निस्पृहसागरजी का सानिध्य भी प्राप्त होगा। शोभायात्रा का आरंभ सुखलिया मंदिर से हीरानगर थाने की रोड से सिक्का स्कूल, विजयनगर मंदिर, महावीर किराना, पहनावा, पीयूषबूल गली से सत्यसाईं चौराहा होते हुए पंच बालयति मंदिर पहुंचेगी। इसमें बड़ी संख्या में सकल जैन समाज को शामिल होने का आग्रह किया गया है।

इधर, श्रुत साधना महोत्सव में आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस मनाया गया। श्रुत आराधना महा महोत्सव के तहत तीसरे दिन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के जयघोष के साथ अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजन हुए। समवशरण महामंडल विधान में मान स्तंभ, खतिका भूमि संबंधी अर्घ्य सुरेश मलैया, संजीव भैया कटंगी ने समर्पित करवाए। संस्था केसरी के राहुल जैन ने बताया कि मुनिश्री निष्पक्षसागरजी महाराज और निस्प्रहसागरजीम महाराज के सानिध्य में आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस भी मनाया गया। अभा विश्व हिंदू परिषद अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला भी मौजूद रहे। मुनिश्री निष्पक्षसागरजी ने प्रवचन में आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज को स्मरण किया। धर्मसभा को संबोधित किया।

चौबीसी तीर्थंकर के पंचकल्याणकों के 120 अर्घ्य समर्पित

चौथे दिन श्रुत आराधना के तहत अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद समवशरण महामंडल विधान में चौबीसी तीर्थंकर संबंधी पंचकल्याणकों के 120 अर्घ्य समर्पित ब्रह्मचारी सुरेश मलैया, संजीव भैया कटंगी ने समर्पित करवाए। मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी एवं निस्पृह सागर जी के सानिध्य में सभी इंद्र-इंद्राणियों ने समवशरण की पूजन भक्ति भाव से की। मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि सभी जीव आकर एक साथ बैठकर प्रभु की वाणी को धन्य करते हैं। उसी का नाम समवशरण है। जन्म-जन्म के बैरी जीव सांप, नैवला, शेर-गाय एक साथ आकर सभा में बैठकर प्रभु की वाणी का रसास्वादन कर सम्यक्तव को ग्रहण कर स्वर्ग और मोक्ष को प्राप्त होते हैं।

इस अवसर पर चित्रानावरण, दीप प्रज्वलन का सौभाग्य बाल ब्रह्मचारी सुरेश मलैया, प्रदीप पीयूष, जिनेश मलैया, संजीव भैया कटंगी, राजेश भैया टडा, अंकित भैया भिलाई, विकास भैया रहली आदि सभी त्यागी व्रती ने प्राप्त किया। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य जितेंद्र जैन पंच बालयति परिवार,राजकुमारी, उमा जैन बजरंगनगर परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रक्षालन एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य आरती अजय जैन परिवार आरती जितेंद्र जैन, दिव्यांशी जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

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