सभी धर्मों में मंत्रों के जप को प्राथमिकता दी गई है। अध्यात्म में मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। मंत्रों के जाप से मन को शांति, आत्मबल में वृद्धि, पापों का क्षय, ईश्वर से साक्षात्कार एवं संयम पथ पर चलने की प्रेरणा मिलती है। यह बात मुनिश्री विलोकसागर जी ने कही। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…
मुरैना। सभी धर्मों में मंत्रों के जप को प्राथमिकता दी गई है। अध्यात्म में मंत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। मंत्रों के जाप से मन को शांति, आत्मबल में वृद्धि, पापों का क्षय, ईश्वर से साक्षात्कार एवं संयम पथ पर चलने की प्रेरणा मिलती है। मंत्र जप एक आध्यात्मिक अभ्यास है। जिसका उद्देश्य मानसिक शांति, एकाग्रता और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करना है। मंत्रों के सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए तन-मन और शरीर की शुद्धि आवश्यक होना चाहिए। शांत और स्वच्छ स्थान पर एकाग्र होकर प्रतिदिन एक निश्चित संख्या में मंत्रों का जाप करना ही श्रेष्ठ होता है। मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में यह बात कही। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन में णमोकार मंत्र सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है।
इस अनादिनिधन मंत्र में किसी व्यक्ति विशेष को नमस्कार नहीं किया गया है, बल्कि उनके गुणों को नमस्कार किया गया है। इस महामंत्र में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और इस संसार के समस्त साधुओं को नमस्कार किया गया है। इस मंत्र के जप से सभी प्रकार के पापों का क्षय होता है। इस मंत्र को सभी मंगलों में पहला मंगल माना जाता है। मुनिश्री ने कहा कि इस मंत्र का नियमित जाप मन को शांति देता है, तनाव और चिंता दूर करता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। प्रत्येक मांगलिक कार्य की शुरुआत में सबसे पहले णमोकार मंत्र का ही स्मरण करना चाहिए। श्रद्धा, भक्ति एवं शुद्धता के साथ मंत्रों के जाप एवं लेखन से सभी कार्य निर्विघ्न सम्पन्न होते है, अलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है और पुण्य का संचय होता है।
णमोकार महामंत्र लेखन पुरस्कार वितरण 26 को होगा
विद्वत नवनीत शास्त्री एवं अक्षय जैन इंजीनियर ने बताया कि मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज की प्रेरणा एवं सानिध्य में णमोकार मंत्र लेखन का कार्य विगत दो माह से चल रहा था। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी लोगों को पुरस्कार वितरण 26 अक्टूबर को दोपहर 2 से बड़े जैन मंदिर में किया जाएगा। णमोकार लेखन की पुस्तिकाएं जमा हो चुकी हैं। जिसमें सर्वाधिक 64000, 60014, 52500, 49772, 35000 बार णमोकार मंत्र लिखा गया है। 25000 णमोकार मंत्र लिखने वाले 9 लोग, 21000 से अधिक बार छह लोग, 15000 से अधिक बार 22 लोगों ने महामंत्र का लेखन किया है। इसी तरह 11000 से अधिक बार 56 लोगों ने लिखकर करीबन 24 लाख 27 हजार बार णमोकार मंत्र लिखकर एक कीर्तिमान स्थापित किया है। इसी क्रम में 150 लोगों ने 11000 से कम बार णमोकार मंत्र लिखे हैं। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पाने वाले को रेफ्रिजरेटर, द्वितीय स्थान पाने वाले को वॉशिंग मशीन, तृतीय स्थान पाने वाले को आटा चक्की, चतुर्थ स्थान पाने वाले को मिक्सर एवं पंचम स्थान एवं अन्य सभी प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया जाएगा पूजा के बर्तन आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।
इस णमोकार मंत्र प्रतियोगिता में पुण्यार्जक परिवार गंगाविशन, अशोककुमार, कैलाशचंद, सूर्यनारायण, प्रेम नारायण, शिवनारायण, बलराम जैन, प्रद्युम्न जैन, अनिल जैन, बबली जैन, मदन मोहन जैन, अखिलेश जैन, सोनू जैन इंजीनियर, रविंद्र जैन, प्रवीन जैन जौरा के सौजन्य से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। पुरस्कार वितरण के समय प्रतियोगियों का उपस्थित रहना आवश्यक है अन्यथा वे पुरस्कारों से वंचित हो सकते हैं।
25 को विधान एवं 26 को पिच्छिका परिवर्तन
वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन दयेरी वाले ने बताया कि पिच्छिका परिवर्तन समारोह से पूर्व 25 अक्टूबर को प्रातः श्री मुनिसुवृतनाथ विधान होगा। 26 अक्टूबर को प्रातः श्री भक्तामर विधान होगा और दोपहर 1 बजे से मुनिराज श्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज का भव्य पिच्छिका परिवर्तन समारोह होगा। कार्यक्रम के समापन पर सभी के लिए वात्सल्य भोज की व्यवस्था रखी गई है।













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