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मुनिश्री सुधासागर महाराज के सानिध्य में हो रही धर्म आराधना : भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान 30 मार्च से


श्री यशोदय तीर्थ में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान 30 मार्च से 8 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


महरौनी (ललितपुर)। श्री यशोदय तीर्थ में जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के सानिध्य में भव्य पंचकल्याणक महोत्सव एवं चौबीस समवशरण विधान 30 मार्च से 8 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 30 मार्च को घटयात्रा, 3 अप्रैल को भगवान महावीर जयंती के अवसर पर भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव एवं जन्माभिषेक एवं 8 अप्रैल को गजरथ महोत्सव होगा।

जिन अभिषेक-शांतिधारा

प्रातःकालीन बेला में मुनिश्री के सानिध्य में जिन अभिषेक और शांतिधारा हुई, जिसका सौभाग्य आदिनाथ पूजन समिति, अनंत कुमार आगरा, संदीप थाटोल बांसवाड़ा, मनीष पवन दिल्ली, विनय सोगानी जयपुर, विमल कठरया, पवन सिंघई एवं अशोक सराफ को प्राप्त हुआ। मुनिश्री सुधासागर महाराज को आहार देने का सौभाग्य राजेंद्र जिनेश मलैया एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर को आहार देने का सौभाग्य अभय घिया को प्राप्त हुआ।

भक्त का स्वभाव भक्ति करना

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा कि गुणहीन को अगर गुणी बनना है तो गुणसहित भक्त दरवाजे हमेशा बने रहो, उद्धार हो जाएगा। प्रभु भक्ति को न करने में नुकसान भक्त का है। जिस प्रकार नीम का स्वभाव कड़वाहट है, रोगों को दूर करना है। उसी प्रकार भक्त का स्वभाव भी भक्ति करना है। भक्ति से लाभ भक्त का है। जिस दिन भी भक्ति अभिषेक ना कर पाओ तो समझ लेना मेरा कितना बड़ा नुकसान हो गया। जिस प्रकार व्यक्ति का ट्रेन में रिजर्वेशन होता है और व्यक्ति 4:00 बजे भी सोता है और 6:00 बजे ट्रेन होती है तो व्यक्ति 5:00 स्टेशन पहुंच जाता है। लेट हो जाता है तो चलती ट्रेन को पकड़ने कर उस पर लटकने का प्रयास करता है। उसी प्रकार प्रभु भक्ति की ट्रेन है। रोज समय से अभिषेक करना, लेट हो जाओ तो भी जाना है। नहीं तो अगर ट्रेन छूटी तो आगे का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा और इसमें नुकसान स्वयं का होगा। हम संसार का कार्य तो समय से निश्चित करते हैं तो प्रभु की भक्ति को भी समय निर्धारण कर दिनचर्या में लाना चाहिए। जहां दो पक्ष राग हो वह संसार है और एक पक्ष राग से वह मोक्ष मार्ग है। इस संसार में नरम और गरम विचार के सभी व्यक्ति हैं अर्थात संसार में नरमी और गर्मी दोनों आवश्यक है। अपने विचार में भी दोनों चाहिए। पारसनाथ ने द्वेष करना छोड़ दिया परंतु कमठ का बैर चलता रहा और दसवें भव में अंत हो गया। क्रोध ईंधन का कारण है। ईंधन को मत आने दो। कमठ के ईंधन थे पारसनाथ परंतु पारसनाथ ने क्रोध नहीं किया।

अपने को ईधन नहीं बनाया अर्थात क्रोध के कारण आने पर भी शांत भाव से अपनी तपस्या में लीन रहे और उन्होंने मोक्ष मार्ग को प्राप्त कर लिया और अरिहंत हो गए अर्थात क्रोध करने मे सिर्फ कमठ एक पक्ष रहा। अगर दोनों पक्ष रहते तो आज पारसनाथ और कमठ का बैर चलता रहता और जाने कितने भव तक उनको मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। गुरुवर कहते हैं कि ऐसा विचार करो कि वह दिन मेरे लिए अशुभ है, जिस दिन प्रभु का दर्शन, अभिषेक मैं नहीं कर पाया। मंच संचालन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश और नितिन शास्त्री ने किया। आभार निशांत जैन वरगया ने व्यक्त किया।

पंचकल्याणक को लेकर है उत्साह

नगर में पंचकल्याणक महोत्सव को लेकर भक्त जन बहुत उत्साहित नजर आ रहे हैं और पंचकल्याणक महोत्सव के मुख्य पात्र भगवान के माता-पिता आनंद सराफ एवं स्नेहलता जैन का घर घर में गोदभराई की रस्म की जा रही है। सौधर्म इंद्र परिवार कपिल चक्रेश बुखारिया का सम्मान किया जा रहा है।

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