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पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारंभ : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ के सान्निध्य में मांगलिक क्रियाएं संपन्न


अतिशय क्षेत्र वही पारसनाथ तीर्थ में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में तथा बाल ब्रह्मचारी संजय मुरैना के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है। पढ़िए नीता जैन की रिपोर्ट…


मंदसौर। अतिशय क्षेत्र वही पारसनाथ तीर्थ में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में तथा बाल ब्रह्मचारी संजय मुरैना के कुशल निर्देशन में संपन्न हो रहा है।

गर्भ कल्याणक से हुआ महोत्सव का शुभारंभ

महोत्सव के पहले दिन प्रातःकाल अभिषेक और शांतिधारा के साथ शुभारंभ हुआ। इसके पश्चात गर्भ कल्याणक महोत्सव बड़े उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। सभी मांगलिक क्रियाएं आचार्य संघ की दिव्य उपस्थिति में विधिपूर्वक संपन्न हुईं।

तीर्थंकरों का गर्भकल्याणक अद्वितीय – आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने कहा:

“प्रत्येक जीव गर्भ में आता है, किंतु तीर्थंकरों का गर्भकल्याणक ही पूजनीय होता है, क्योंकि वे अंतिम बार गर्भ में आते हैं और फिर संसार भ्रमण से मुक्त होकर सिद्ध शिला पर विराजमान हो जाते हैं।”

उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि उद्धत भावों के साथ पंचकल्याणक में भाग लें ताकि जीवन के भवभ्रमण का नाश होकर शाश्वत आनंद की प्राप्ति हो।

17 अप्रैल को जन्म कल्याणक का भव्य आयोजन

महोत्सव के तहत 17 अप्रैल को 211 तीर्थंकरों के जन्म कल्याणक का आयोजन हुआ। सुबह 6:00 बजे अभिषेक, पूजन एवं सौधर्म इंद्र द्वारा बाल तीर्थंकर के दर्शन के साथ भव्य कार्यक्रमों की श्रृंखला आरंभ हुई। ऐरावत हाथी पर विराजमान बाल तीर्थंकर का पांडुकशीला पर अभिषेक किया गया।

प्रातः 9:00 बजे नगर में जन्म कल्याणक जुलूस निकाला गया तथा रात्रि में आरती, पालना व बाल क्रीड़ा जैसे भावविभोर कार्यक्रम हुए। 18 अप्रैल को तप कल्याणक मनाया गया।

आगामी दिवसों का कार्यक्रम

19 अप्रैल: ज्ञान कल्याणक

20 अप्रैल: मोक्ष कल्याणक एवं महोत्सव का भव्य समापन

समिति अध्यक्ष का स्वागत वक्तव्य

महोत्सव समिति के अध्यक्ष शांतिलाल बड़जात्या ने त्रिलोकचंद छाबड़ा व जम्बुकुमार सोगानी जैसे मांगलिक क्रियाओं के लाभार्थियों का हृदय से अभिनंदन किया।

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