गढ़ी से विहार कर प्रातः जब आचार्य श्री श्रेय सागरजी महाराज जी का ससंघ डडूका में मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने पलक पांवड़े बिछाकर उनकी भव्य अगवानी की। डडूका से पढ़िए, यह खबर…
डडूका। गढ़ी से विहार कर प्रातः जब आचार्य श्री श्रेय सागरजी महाराज जी का ससंघ डडूका में मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने पलक पांवड़े बिछाकर उनकी भव्य अगवानी की। जगह-जगह पर आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन कर भक्तों ने उनकी चरण रज को मस्तक से लगाया। मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के दर्शनों के बाद आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर हमें सदमार्ग दिखाने के आयतन हैं। हमें हमेशा संतों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने जीवन को चार दिन का बताते हुए समाधि मरण को सर्व श्रेष्ठ मरण बताया। सुबह, दोपहर, शाम और रात में ही हमारा सारा जीवन सिमट जाना है। शतकीय आयु तो कोई कोई ही पूरी कर पाता है। चार दिनों के इस अनमोल जीवन को हमने क्रोध, मान, माया ओर लोभ में ही व्यर्थ गंवा दिया है।
आचार्य संघ को श्रीफल भेंट किया
आचार्य श्री ने गुस्से को जीवन का नाश करने वाला ओर संबंधों को को खत्म करने वाला बताते हुए कहा कि इसकी पराकाष्ठा तो तब हो जाती है जब हम छोटी-छोटी बातों को लेकर मंदिरों के भगवान के सामने ही गुस्सा करने लग जाते हैं। आचार्य श्री ने गुरुवार को अंतिम समय में जयकुमार शाह को नवकार मंत्र सुनाकर उनकी देह परिवर्तन यात्रा को मृत्यु महोत्सव में बदल दिया। प्रवचन के बाद समाजजनों ने आचार्य संघ को श्रीफल भेंटकर होली तक डडूका में ही प्रवास करने आग्रह किया। प्रवचन सभा का संचालन राजेंद्र कोठिया ने किया।आभार चिराग जैन ने व्यक्त किया।













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