आचार्य श्री 108 विपुल सागर जी के शिष्य आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर जी और मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज का का भव्य मंगल प्रवेश रविवार को प्रातः8 बजे झुमरी तिलैया कोडरमा धर्म नगरी में हुआ। जहां शहर के मुख्य द्वार पर शहर के समाज के सभी पदाधिकारी गण महिला समाज के पदाधिकारी गण गाजे-बाजे के साथ अगवानी की। नगर भ्रमण करते हुए बड़ा जैन मंदिर जी पहुंचे। झुमरी तिलैया से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा और नवीन जैन की यह खबर…
झुमरीतिलैया। जैन धर्म के सबसे बड़े तपस्वी जिनकी चर्या में तप और त्याग झलकता है ऐसे आचार्य श्री 108 विपुल सागर जी के शिष्य आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर जी और मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज का का भव्य मंगल प्रवेश रविवार को प्रातः8 बजे झुमरी तिलैया कोडरमा धर्म नगरी में हुआ। जैन मुनि खाली पैर पद गया नगरी से पद विहार करते हुए गुनावा ,नवादा होते हुए लगभग 200 किमी की पद यात्रा करते हुए यहां पहुंचे। जहां शहर के मुख्य द्वार पर शहर के समाज के सभी पदाधिकारी गण महिला समाज के पदाधिकारी गण गाजे-बाजे के साथ अगवानी की। नगर भ्रमण करते हुए बड़ा जैन मंदिर जी पहुंचे। जहां पर आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर मुनि श्री के मुखारबिंद से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद मंगलाचरण जैन सुबोध गंगवाल, जैन आशा गंगवाल ने किया। दीप प्रज्वलन गया जी समाज के पदाधिकारीगण ने किया। मुनि संघ को स्थानीय नगरी में प्रवास के लिए श्रीफल चढ़ाया।
यह कोडरमा वालों का बहुत सौभाग्य है
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि यह गर्मी तपन तप रही है। गर्मी की तपिश से ज्यादा जो शरीर में अंदर की तपन और त्याग को जीत लेता है। वह अपने जीवन को जीत लेता है। उन्होंने कहा कि यह कोडरमा एक धर्म नगरी है। जहां बहता योगी रमता पानी कहावत के अनुसार गुरुवर जैन संत का सम्मेदशिखर जी जाने के क्रम में यहां पर आगमन हो जाता है। यह कोडरमा वालों का बहुत सौभाग्य है। आगे समाज के पदाधिकारी गणों ने गया जी समाज के सभी पदाधिकारियों का स्वागत किया। सोमवार को आचार्य संघ के सानिध्य में श्री शांतिनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।













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