जन्म देने वाली मां के संस्कार सदैव चिस्मरणीय होते हैं। ऐसी ही शिक्षिका मां के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने वाले शिक्षक उनकी ही प्रेरणा से सरकारी स्कूल का विकास कर रहे हैं। कसरावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
कसरावद/सनावद। जन्म देने वाली मां के संस्कार सदैव चिस्मरणीय होते हैं। ऐसी ही शिक्षिका मां के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने वाले शिक्षक उनकी ही प्रेरणा से सरकारी स्कूल का विकास कर रहे हैं। स्कूल में अब तक डेस्क, दरी, पुस्तकालय, प्रेरक पंपलेट लगाकर विद्यार्थियों को न केवल स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, बल्कि सुविचारों से चरित्र निर्माण भी कर रहे हैं। जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय कमोदवाड़ा के शिक्षक विनीत जैन वर्ष 2013 से इस अनुकरणीय कार्य में लगे हैं। उनकी माता रजनी जैन यहां सरकारी स्कूल में शिक्षिका रही है। उनके निधन के बाद बेटे विनीत को अनुकंपा नियुक्ति मिली। निधन से पहले उनकी मां कहती थी कि अपनी कमाई का दो प्रतिशत हिस्सा दान करना चाहिए। उनकी इस बात से प्रेरणा लेकर बेटा विनीत अपने ही वेतन से राशि दान करने लगे। वे दान की इस राशि को अपने ही स्कूल के विकास में लगाने लगे। शिक्षक विनीत ने बताया कि वे 2013 में शासकीय माध्यमिक शाला कमोदवाड़ा में नियुक्त हुए हैं। इसके बाद सर्वप्रथम विद्यार्थियों को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि बेहतर शिक्षा के साथ अपने ही स्कूल में व्यवस्थाएं जुटाई जाए,ताकि विद्यार्थी स्कूल आने के लिए प्रेरित हो।
बैठक व्यवस्था के साथ पुस्तकालय बनवाया
शासकीय माध्यमिक विद्यालय कमोदवाडा में रहते हुए शिक्षक विनीत ने बैठक व्यवस्था सुधरवाई। उन्होंने 25 डेस्क बनवाई। इसके अलावा 4 बाय 16 की 6 दरियां बनवाई। उन्होंने यह सामग्री स्कूल को भेंट की। तीन कक्षा में बैठक व्यवस्था के साथ स्वच्छता का भी ध्यान रखा जा रहा है। दीवारों पर प्रेरणादाई और सुविचारों के पंपलेट लगाए गए। स्कूल में पैकेट पुस्तकालय भी संचालित किया जा रहा है। विनीत ने स्वयं के खर्चे से बिजली फिटिंग भी करवाई है। इसके अलावा कक्षो में कारपेट भी लगाया है। विनीत कहते हैं कि सरकारी स्कूल को भी निजी शालाओं की तरह संचालित करना चाहते हैं। ताकि अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूल में प्रवेश ले सके। उन्होंने परिसर में पौधारोपण भी कराया है। विनीत जैन का कहना है कि इस कार्य के लिए उनकी धर्मपत्नी प्रीति जैन एवं ससुर कल्याणकुमार जैन केके सनावद समय-समय पर मार्ग दर्शन करते रहते हैं। इस नेक कार्य के लिए ग्रामीणों के साथ-साथ जैन समाज के सभी लोग भी इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा कर रहे हैं।













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