शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक दिवस पर समवशरण मंदिर, कंचन बाग में शांतिनाथ भगवान की स्फटिक मणि की प्रतिमा को मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी महाराज के सानिध्य, पंडित रतनलालजी एवं ब्रह्मचारी पीयूष भैया के निर्देशन में स्वर्ण वेदी पर स्थापित कर भगवान के मस्तक पर स्वर्ण-रजत कलश से महामस्तकाभिषेक एवं शांति धारा की गई। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
इंदौर। शांतिनाथ भगवान के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक दिवस पर समवशरण मंदिर, कंचन बाग में शांतिनाथ भगवान की स्फटिक मणि की प्रतिमा को मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी एवं मुनि श्री सहज सागर जी महाराज के सानिध्य, पंडित रतनलालजी एवं ब्रह्मचारी पीयूष भैया के निर्देशन में स्वर्ण वेदी पर स्थापित कर भगवान के मस्तक पर स्वर्ण-रजत कलश से महामस्तकाभिषेक एवं शांति धारा की गई। मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में प्रतिमा के समक्ष निर्वाण लाडू चढ़ाए गए। इसी के साथ तीन दिवसीय स्वर्ण वेदी स्थापना एवं महामस्तकाभिषेक समारोह संपन्न हुआ।
इन्हें मिला सौभाग्य
महामस्तकाभिषेक के प्रथम, द्वितीय कलश करने का सौभाग्य शरद सेठी एवं धीरेंद्र वोबरा परिवार एवं शांति धारा करने का सौभाग्य आजाद जी बीड़ी वाले एवं शरद शास्त्री परिवार ने प्राप्त किया। श्रीजी के समक्ष निर्वाण लाडू पुष्पा कासलीवाल अनूप भवन, हंसमुख जैन गांधी और श्री राराजी परिवार ने समर्पित किए।

बना प्रमुख तीर्थ स्थल
इस अवसर पर मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए सवशरण मंदिर ट्रस्ट एवं समाज को शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के स्वर्ण वेदी पर विराजमान होने के उपलक्ष में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी और कहा कि अब समवशरण मंदिर और कंचन बाग की शोभा एवं ख्याति द्विगुणित और तीर्थ स्वरूप हो गई है। भविष्य में जो भी जैन यात्री इंदौर आएंगे, वे प्रतिमा के दर्शन करने समवशरण मंदिर अवश्य आएंगे। प्रचार प्रमुख राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री की प्रेरणा से प्रेरित होकर समवशरण मंदिर के जिस हॉल में स्फटिक मणि की प्रतिमा स्वर्ण वेदी पर विराजमान है, उसे भी समाज एवं मंदिर ट्रस्ट द्वारा शीघ्र ही स्वर्ण टाइल्स से सज्जित किये जाने की घोषणा की गई।













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