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चातुर्मासिक धर्म सभा में दिए प्रवचन : भगवान आप केवल ज्ञानी हैं, मेरे कष्टों को दूर कर दो – विज्ञानमति माताजी


उदयनगर स्थित धर्मसभा में आर्यिका विज्ञानमति माताजी ने कहा कि बड़प्पन बनाकर रखो, बेटा तुम्हारी हर बात मानेगा, क्यों नहीं मानेगा। एक भी बात का उल्ल्ंघन नहीं कर सकता। बड़प्पन बनाए रखने के लिए बहुत गम खाना पड़ता है और कम खाना पड़ता है। बड़ा बनने के लिए अपने आश्रितों का भी बहुत खयाल रखना पड़ता है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। बड़प्पन बनाकर रखो, बेटा तुम्हारी हर बात मानेगा, क्यों नहीं मानेगा। एक भी बात का उल्ल्ंघन नहीं कर सकता। बड़प्पन बनाए रखने के लिए बहुत गम खाना पड़ता है और कम खाना पड़ता है। बड़ा बनने के लिए अपने आश्रितों का भी बहुत खयाल रखना पड़ता है। हे भगवान आप केवलज्ञानी हैं, मेरे कष्टों को ठीक कर दो।

पता है भगवान ठीक नहीं करेंगे फिर भी भक्ति में ऐसा कहते हैं कि.हम तो आपकी शरण में आए हैं, संसार में मेरे दुखों को मिटाने की क्षमता और किसी में नहीं है। गांव का कोई अध्यक्ष,मंत्री, पंच हो वो भी गांव के दुखी लोगों के कष्ट को मिटा देता है। आप तो तीन लोक के स्वामी हैं, इसलिए हे भगवान, मेरे सारे कष्टों को दूर कर दीजिए। यह उद्गार विज्ञानमति माताजी ने उदय नगर में धर्मसभा में व्यक्त किए।

रंग-रूप सब कुछ नहीं होता

उन्होंने स्त्रियों और बहुओं के संबंध में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दूसरे की स्त्री में उपेक्षा भाव रखना चाहिए। सबसे अच्छी, सबसे समझदार और सबसे सुंदर स्त्री मेरी है ये विश्वास रखना चाहिए। रंग -रूप सब कुछ नहीं होता। व्यक्तित्व अच्छा होना चाहिए। दूसरे की स्त्री कितनी भी सुंदर हो, कितनी भी गुणवान हो लेकिन मेरे काम नहीं आएगी, मेरी स्त्री ही काम आएगी।

किसी के सुंदर शरीर को देखकर ईर्ष्या मत करो। अरे ये इतना अच्छा है, ये इतने उपवास कर लेता है। अन्य का शरीर हमारे काम नहीं आएगा, अपने को जो शरीर मिला है। इसका सदुपयोग कैसे कर सकते हैं। यह विचार हमें करना चाहिए। इसका उपयोग करके सुंदर व श्रेष्ठ शरीर वाले से ज्यादा अपना भव सुधार सकते हो।

अपनी बहू की तारीफ करो

माताजी ने यह भी कहा कि हम तो बहुत महिलाओं को कहते हैं कि अपनी बहू ही काम आएगी। दूसरे की बहू कितनी भी अच्छी हो, तुम्हारे काम नहीं आएगी। दूसरे की बहू सेवाभावी हुई तो एक दिन के लिए आपके काम आ जाएगी लेकिन बार-बार काम नहीं आएगी। दूसरे की बहू को देख देखकर के बोलते हो कि वो कितनी अच्छी है, तुम ऐसी हो तुम वैसी हो। फिर वो बहू एक दिन अपनी सास को कह ही देगी कि ठीक है अब तो मैं ऐसी ही बनूंगी।

अभी तक तो कच्ची थी, अब पक्की ऐसी ही हो जाऊंगी। इसलिए ना ऐसा सोचो ना बोलो अपनी जो खोटी बहू है वही काम आने वाली है इसलिए ये मत सोचो कि सबसे अच्छी बहू किसकी है ?यह सोचो -कहो कि हमारी बहू ही,सबसे अच्छी है ऐसा कहने से तुम्हारी बहू निश्चित ही अच्छी बन जाएगी। मैं तो सासुओं को भी बहुत कहती हूं कि अपनी बहू की खूब प्रशंसा किया करो। यदि आपने 6 महीने बहू की प्रशंसा की तो वो सही में अच्छी बन जाएगी। याद रखो सास- बहू, तुम दोनों को ही अंतिम समय तक साथ में रहना है। प्रशंसा करते रहो, वो कितनी भी बुरी हो तुम अपने भाव अच्छे रखो। भाव अच्छे हैं तो भव सुधरेगा, नहीं तो तुम कितनी भी बुराई कर लो वो और ज्यादा बुरी हो जाएगी। तुम क्लेश करते रहोगे और बुराई करने के पाप का फल भी तुम्हें भोगना ही पडेगा।

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