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चातुर्मासिक धर्म सभा में प्रवचन : भगवान व्यापारी नहीं हैं, उनसे कुछ मत मांगो -आचार्य विहर्ष सागर महाराज


राष्ट्रसंत आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज ने मोदी जी की नसियां में बुधवार को सम्यक दर्शन पर प्रवचन देते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दो प्रकार के लोग होते हैं। सम्यक दृष्टि जीव देव, शास्त्र, गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए शंका नहीं करता, साधु साधु में भेद नहीं करता। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। राष्ट्रसंत आचार्य श्री विहर्षसागरजी महाराज ने मोदी जी की नसियां में बुधवार को सम्यक दर्शन पर प्रवचन देते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि और मिथ्या दृष्टि दो प्रकार के लोग होते हैं। सम्यक दृष्टि जीव देव, शास्त्र, गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा रखते हुए शंका नहीं करता, साधु साधु में भेद नहीं करता। उसका उठना, बैठना खाना-पीना, बोलना, देव दर्शन करना सब आगम के अनुसार होता है, जबकि मिथ्या दृष्टि मनमर्जी करते हुए घर-परिवार, समाज एवं धर्म क्षेत्र में अपने मन के अनुसार आचरण करता है। वह जैन होकर भी जैनत्व के संस्कारों से विहीन होता है। आज मनुष्य के जीवन में जितनी भी बुराइयां हैं, वे सब मिथ्यात्व के कारण हो रही हैं।


मेरा मुझसे मिलन करा दें

आचार्य श्री ने आगे कहा कि देव, शास्त्र, गुरु के प्रति श्रद्धा रखो। भगवान व्यापारी नहीं हैं, जब भी मंदिर में उनके दर्शन को जाओ तो उनसे कुछ मांगो मत। मांगना ही है तो आशीर्वाद मांगते हुए यह भावना भाओ कि हे प्रभु आप तो केवल ज्ञानी और सिद्ध स्वरूपी मुक्ति पथ के नेता हैं। मैं आपके चरणों में इसलिए आया हूं कि आप मेरा मुझसे मिलन करा दें ताकि आपका स्मरण करते हुए और जिनवाणी सुनते हुए मेरी समाधि निर्विघ्न हो जाए।

अहिंसा जैन धर्म की आधारशिला

धर्म सभा में मुनि श्री विजयेशसागर जी महाराज ने कहा कि जिन भगवान महावीर के शासन में हम सब विराजमान हैं। उन्होंने सबसे पहले अहिंसा के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। अहिंसा जैन धर्म की आधारशिला है। जैन महावीर के वंशज कहलाते हैं। सच्चा जैन श्रावक वह है जो आवश्यक अष्ट मूल गुणों का पालन करता है, पानी छानकर पीता है, रात्रि में भोजन नहीं करता और व्यापार-व्यवसाय एवं अपने दैनिक जीवन, व्यवहार, खानपान में अहिंसा धर्म का पालन करता है। प्रारंभ में मंगलाचरण पंडित रमेश चंद बांझल ने किया। दीप प्रज्वलन योगेन्द्र काला, राजेंद्र सोनी, रमेशचंद जैन एमपीईबी, निर्मल अग्रवाल एवं सोनाली बागड़िया ने किया। आचार्य श्री को श्रीफल समर्पित कर रितेश पाटनी, डी एल जैन, राजेश जैन दद्दू, पूर्व पार्षद पवन जैन और मुक्ता जैऩ ने आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन कमल काला ने किया।

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