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महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या पर गर्भकल्याणक मनाया: नाटक का प्रभावी मंचन ने सभी को किया विभोर 


श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या में भगवान महावीर के गर्भकल्याणक का सुंदर दृश्य पंडित वाणी भूषण आशुतोष शास्त्री जी के कुशल संचालन एवं निर्देशन में हुआ। जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अनंत कुमार जैन एवं उनकी धर्मपत्नी ने प्राप्त किया एवं कुबेर महाराज का नाट्य रूपांतरण संजीव कुमार जैन को प्राप्त हुआ। आगरा से पढ़िए राहुल जैन की यह खबर…


आगरा। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा आगरा में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक महोत्सव की पूर्व संध्या में भगवान महावीर के गर्भकल्याणक का सुंदर दृश्य पंडित वाणी भूषण आशुतोष शास्त्री जी के कुशल संचालन एवं निर्देशन में हुआ। जिसमें भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य अनंत कुमार जैन एवं उनकी धर्मपत्नी ने प्राप्त किया एवं कुबेर महाराज का नाट्य रूपांतरण संजीव कुमार जैन को प्राप्त हुआ। नाटक में बड़े ही सुंदर तरीके से अष्टकुमारियों ने मिलकर के माता को सुंदर-सुंदर श्रृंगार किया एवं माता का स्नान कराया एवं साथ ही साथ माता को 16 सपने देखने को सौभाग्य मिला। जिसका फल महाराज ने अपने सभा में बताया कि आपके उदर में तीर्थंकर बालक का अवतरण हो चुका है। यह सारा नाटक पंडित आशुतोष शास्त्री के निर्देशन में हुआ एवं इस नाटक को श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में किया गया। नाटक एवं सभा में पूरा महिला मंडल पुरुष मंडल बालिका मंडल एवं आगरा के गणमान्य लोग उपस्थित थे। आनंद उठाया एवं अंत में माता की गोद भी सभी लोगों ने मिलकर के भरी। जिससे सभी लोगों ने अति उत्साह के साथ भजन संध्या का भी आनंद लिया यह सारा कार्यक्रम संगीतबद्ध तरीके से किया गया।

इस अवसर पर स्वप्नों के फल जाने इन समाजजनों ने 

भगवान महावीर के जन्म से पूर्व एक बार महारानी त्रिशला नगर में हो रही अद्भुत रत्नवर्षा के बारे में सोच रही थीं। यह सोचते-सोचते वे ही गहरी नींद में सो गई। उसी रात्रि को अंतिम प्रहर में महारानी ने सोलह शुभ मंगलकारी स्वप्न देखे। वह आषाढ़ शुक्ल षष्ठी का दिन था। रानी त्रिशला ने गर्भस्थिति में यह मंगलकारी शुभ स्वप्न देखें। सुबह जागने पर रानी के महाराज सिद्धार्थ से अपने स्वप्नों की चर्चा की और उसका फल जानने की इच्छा प्रकट की। राजा सिद्धार्थ एक कुशल राजनीतिज्ञ के साथ ही ज्योतिष शास्त्र के भी विद्वान थे। उन्होंने रानी से कहा कि एक-एक कर अपना स्वप्न बताएं। वे उसी प्रकार उसका फल बताते चलेंगे। तब महारानी त्रिशला ने अपने सारे स्वप्न उन्हें एक-एक कर विस्तार से सुनाएं। इस मौके पर अध्यक्ष राजेश बैनाड़ा, मंत्री विजय जैन, अनिल आदर्श जैन, महेश चंद जैन, संजीव जैन, सुशील जैन, दिलीप जैन राकेश जैन पेंट, जितेश जैन, राकेश जैन टीचर, वैभव जैन, मोहित जैन, आलोक जैन, प्रशांत जैन, मनोज जैन, दीपेश जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज मौजूद थे।

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