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धूमधाम से हुई वर्षायोग कलश स्थापना : चातुर्मास में बहती है धर्म की गंगा – आर्यिकाश्री धारणामति माताजी


आर्यिका श्री धारणामति, आर्यिका श्री मुदितमति माता जी, आर्यिका श्री शास्त्रमति माता जी ससंघ का मंगल वर्षायोग का सौभाग्य वर्णीनगर मडावरा को प्राप्त हुआ है। वर्षायोग की मंगल कलश स्थापना श्री महावीर विद्याविहार में बड़े ही धूमधाम से आयोजित हुई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


ललितपुर। युग श्रेष्ठ जैनाचार्य विद्यासागर महामुनिराज की पावन अनुकंपा से आर्यिका रत्न 105 दृढ़मति माता जी के आशीर्वाद से आर्यिका श्री धारणामति, आर्यिका श्री मुदितमति माता जी, आर्यिका श्री शास्त्रमति माता जी ससंघ का मंगल वर्षायोग का सौभाग्य वर्णीनगर मडावरा को प्राप्त हुआ है। वर्षायोग की मंगल कलश स्थापना श्री महावीर विद्याविहार में बड़े ही धूमधाम से आयोजित हुई। कार्यक्रम के पूर्व नगर में चातुर्मास में स्थापित होने वाले मंगल कलशों की शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें मडावरा नगर की स्वयंसेवी संस्थाओं ने दिव्य घोष एवं महिला मंडलों ने कलश लेकर भक्ति का प्रदर्शन किया। चातुर्मास कलश स्थापना का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ हुआ।ध्वजारोहण करने का सौभाग्य पंचमलाल जैन दुकानवाले परिवार को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज का अष्ट द्रव्य से सुसज्जित थालों से पूजन किया गया। समारोह में आर्यिका ससंघ को शास्त्र प्रदान करने का सौभाग्य नीलेश जैन दुकानवाले, प्रकाशचंद जैन,अन्नू सेठी, विक्रम बजाज परिवार को प्राप्त हुआ। वर्षायोग के मंगल कलश स्थापना का कार्यक्रम राहतगढ़ से पधारे ब्र. धीरज भैया के निर्देशन एवं नीलेश एंड संगीत पार्टी बुढ़ार के मधुर संगीत के साथ सम्पन्न हुआ।

इन्हें मिला सौभाग्य

वर्षायोग के मुख्य कलशों का सौभाग्य क्रमशः नीलेश जैन बांदरी सागर,नीलेश जैन दुकानवाले, राजीव जैन सौंरयां, अभिनन्दन चौधरी, डॉ. राकेश सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ। बताते चलें कि नगर के ग्यारह जिनालयों में चातुर्मास के कलश स्थापित किए गए और आचार्य श्री के 56वें मुनिदीक्षा दिवस के अवसर पर 56 कलशों को स्थापित करने का सौभाग्य समाज श्रेष्ठियों ने प्राप्त किया।

धर्म ध्यान का समय

इस दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न 105 धारणामति माता जी ने कहा कि चातुर्मास के दौरान साधु चार माह तक एक स्थान पर रुककर धर्म ध्यान करते हैं। श्रावकों को भी धर्म के मार्ग पर चलकर आत्मकल्याण करना चाहिए। श्रावकों को भी चातुर्मास में श्रावकों को साधना करने का मौका मिलता है।आर्यिका श्री 105 मुदितमति माताजी ने कहा कि वर्षायोग में साधु- संतों के शहर,गांव में चातुर्मास होने से चार माह तक धर्म की गंगा बहती रहती है और श्रावकों में धार्मिक संस्कारों के साथ मोक्षमार्ग पर चलने की भावना जागृत होती है। वर्षायोग समिति ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक,शांतिधारा,पूजन, आर्यिका ससंघ के प्रवचन एवं सायंकाल आचार्य भक्ति एवं प्रश्न मंच का लाभ जैन समाज को मिलेगा।आयोजन को सफल बनाने में सकल दिगम्बर जैन समाज मडावरा, वर्षाकाल समिति, नगर की की स्वयंसेवी संस्थाओं का विशेष सहयोग रहा।कार्यक्रम का संचालन ब्र. धीरज जैन ने किया।

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