गजरथ फेरी से हुआ समापन ललितपुर के पंचकल्याणक महोत्सव का

सारांश

मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित ललितपुर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का रविवार को समापन 11 गजरथ महोत्सव के साथ हुआ।


इदौर, राजेश जैन दद्दू| ललितपुर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का रविवार को समापन 11 गजरथ महोत्सव के साथ हुआ।
नगरवासियों को बहुत लंबे समय बाद गजरथ देखने को मिले। वही हीरा मोती गजों की जोड़ी जो 1992 में अशोकनगर गजरथ में शामिल हुये थे, वे इस गजरथ में शामिल थे।

अशोकनगर का रथ भी इस महोत्सव की शोभा बढ़ा रहा था। इससे अशोकनगर के सप्त गजरथ महोत्सव की याद भी ताजा हो गयी। इस महोत्सव में रजत रथ, जैन आर्मी दल, 225 स्वर्ण कमलों की रचना, 8000 इन्द्र-इन्द्राणियां विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के परम सानिध्य में यह महामहोत्सव संपन्न हुआ। प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयस अशोकनगर थे। मुनिश्री की प्रेरणा से ललितपुर नगर में अभिनन्दनोदय तीर्थ की स्थापना हुई है जो अदभुत और विश्व में अपने तरह का पहला तीर्थ है।

7 मंजिला गुफा भव्यता दर्शा रही है। वहीं 7000 किलोग्राम का बड़ा भारी घंटा, 125 किलोग्राम चांदी से निर्मित भव्य छत्र और त्रिकाल चौबीसी, रजत प्रतिमाएं, 125 मीटर उतंग ध्वज, नंदीश्वर जिनालय, सहसत्रकूट जिनालय भव्यता का प्रतीक हैं। इस पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में 1375 जिनबिम्बों की प्रतिष्ठा मुनिश्री सुधासागर जी महाराज एवं मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के कर कमलों से संपन्न हुई।

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