राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित धर्मनगरी कुशलगढ़ में दिगंबर जैन मुनिराज की आहारचर्या के बाद अतिशय हुआ। नगर में नानावटी परिवार के चौके में मुनि 108 श्री पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ शिष्य मुनि उदित सागर जी महाराज के चरण चिह्न लकड़ी के पाटे पर अंकित हो गए। गीले कपड़े से पौंछने के बावजूद चरण चिह्न नहीं मिट पाए। पढ़िए अशोक जेतावत की विशेष रिपोर्ट…
धरियावद। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित धर्मनगरी कुशलगढ़ में दिगंबर जैन मुनिराज की आहारचर्या के बाद अतिशय हुआ। नगर में नानावटी परिवार के चौके में मुनि 108 श्री पुण्य सागर जी महाराज के संघस्थ शिष्य मुनि उदित सागर जी महाराज के चरण चिह्न लकड़ी के पाटे पर अंकित हो गए। गीले कपड़े से पौंछने के बावजूद चरण चिह्न नहीं मिट पाए। यह अतिशय जैन समाज के लोगों में कौतूहल का विषय बन गया है।
महातपस्वी मासोपवसी संत
मुनि संघ का विहार वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्द्धमान सागर जी महाराज की ओर चल रहा है। थांदला में कुछ दिन प्रवास के बाद मुनि संघ ने बांसवाड़ा की ओर विहार किया। मंगलवार को संघ का कुशलगढ़ प्रवेश हुआ। पंच प्रतिमा धारी रानू (मनीषा) नानावाटी नौगामा वालों की ओर से संघ में आहार हेतु चौका लगाया गया। धरियावद नगर गौरव मुनि श्री उदित सागर जी का पड़गाहन सुबह नानावटी परिवार के चौके में हुआ। आहारचर्या पूरी होने के बाद लकड़ी के पाटे को धोकर दीवार के सहारे खड़ा कर दिया गया। मगर दो बार पाटा तेज आवाज के साथ गिर गया। जब रानू दीदी की नजर पाटे पर पड़ी तो उस पर चरण अंकित हुए दिखाई दिए। इसके बाद दो बार गीले कपड़े से पाटे को साफ किया गया, पानी सूख गया लेकिन चरण चिह्न नहीं गए। इस पाटे को मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज के पास रखा गया है। श्रद्धालु मुनिराज के चरण चिह्न के दर्शन कर खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं। मुनि श्री उदित सागर जी महाराज महातपस्वी मासोपवासी संत हैं। वे एक माह में 20 दिन षटरस का त्याग कर नीरस आहार ग्रहण करते हैं।
मनाया जाएगा दीक्षा दिवस
मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज का 7 जून शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर, कुशलगढ़ में 39वां दीक्षा दिवस मनाया जाएगा। इसके बाद संघ का बांसवाड़ा की ओर विहार होगा। बांसवाड़ा में 16 जून रविवार को मुनि संघ का आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज से भव्य मिलन होगा।













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