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मंझार जैन मंदिर के नव निर्माण की तैयारी : सबसे पहले अपनी दृष्टि शुद्ध करो, क्रिया बाद में शुद्ध होगी


मंझार जैन मंदिर के नव निर्माण की तैयारी चल रही है। मुनि श्री सुधासागर महाराज ने इस मंदिर का नया नाम पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर कर दिया है। पारसनाथ धाम मंदिर पाषाण से निर्मित होगा। यह मंदिर 3 मंजिला होगा और तीसरी मंजिल पर पाषाण की भव्य चौबीसी बनेगी।पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


टीकमगढ़। शहर के मध्य में स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन मंझार मंदिर में निर्यापक मुनि श्री 108 सुधासागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 गंभीर सागर जी महाराज विराजमान हैं। प्रतिदिन मुनि श्री के प्रवचन एवं शाम को जिज्ञासा समाधान का आयोजन किया जा रहा है। मंच संचालन अमित भैया जबलपुर द्वारा किया जा रहा है। मंझार जैन मंदिर के नव निर्माण की तैयारी चल रही है। मुनि श्री ने इस मंदिर का नया नाम पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर कर दिया है। पारसनाथ धाम मंदिर पाषाण से निर्मित होगा। यह मंदिर 3 मंजिला होगा और तीसरी मंजिल पर पाषाण की भव्य चौबीसी बनेगी।

सबसे पहले खुद को जानें

शुक्रवार को मुनि श्री सुधासागर जी पारसनाथ धाम स्थित मंच पर विराजमान हुए। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं चित्र आनावरण एवं शास्त्र भेंट का कार्यक्रम संपन्न हुआ। मुनि श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जब कोई व्यक्ति दुनिया को जानने का इच्छुक होता है तो उसके पास कुछ सूत्र होना चाहिए जो उसे अच्छे बुरे रास्तों का ज्ञान करा सके। सबसे पहले उसे यह जानना जरूरी है कि मैं सही हूं या गलत। क्या हमारे पास सत्य को जानने की योग्यता है। जब स्वयं ही असत्य के रास्ते पर चल रहे हो तो सत्य को कैसे जान सकते हो। मुनि श्री ने कहा कि जो स्वयं विक्षिप्त है, वह दुनिया को कैसे जान सकता है। जो स्वयं ही असमर्थ है, वह समर्थवान का साथ कैसे दे सकता है। अंधा व्यक्ति प्रकाश के स्वरूप को जान नहीं सकता। बहरा व्यक्ति शब्दों का आनंद नहीं जान सकता। लंगड़ा व्यक्ति पहाड़ के रास्तों को नहीं बता सकता। पर्वत का रास्ता नहीं बता सकता। मुनि श्री ने कहा कि यहां अंधा व्यक्ति प्रकाश का वर्णन कर रहा है, विकलांग व्यक्ति पर्वत का रास्ता बता रहा है, नशे में रहने वाला व्यक्ति सदमार्ग का रास्ता बता रहा है। सबका स्वरूप क्या है, वह बता रहा है। सबको जानने के पहले अपनी आंखों का ऑपरेशन कराओ। कम से कम सूर्य को देख सको। सूर्य के प्रकाश का आनंद ले सको इसलिए सबसे पहले जैनागम में सम्यक दृष्टि बतलाया गया है, सम्यक ज्ञानी बाद में। सबसे पहले अपनी दृष्टि शुद्ध करो, क्रिया बाद में शुद्ध होगी। पहले अपनी सोच बदलो तुम्हें क्या करना है, क्या नहीं करना है। यह बाद में बात कही गई है। यह देखो तुम्हें कौन से रास्ते पर चलना है। हम उन रास्तों पर चल रहे हैं, यहां मंजिल ही नहीं होती है। इसी कारण से हम संसार सागर में भटक रहे हैं।

मंगल विहार जारी 

आचार्य भगवन विद्यासागर जी महामुनि राज के परम शिष्य ओजस्वी एवं प्रखर वक्ता मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ससंघ विहार नौगांव से अतिशय क्षेत्र बंधा जी के लिए चल रहा है। मुनि संघ का चातुर्मास विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल खजुराहो में संपन्न हुआ था। मुनि संघ की 15 मार्च को अतिशय क्षेत्र बंधा जी में आगवानी की संभावना है। शुक्रवार को मुनि संघ का रात्रि विश्राम सिमरा खुर्द में होगा। रविवार को मुनि संघ की मंगल आगवानी चंदेरा समाज द्वारा की जाएगी।

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