पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां पर मुनि श्री सारस्वत सागरजी के प्रवचन नित हो रहे हैं। इसमें वे धर्म प्रभावना कर रहे हैं। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की खबर…
नांद्रे। पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। यहां पर मुनि श्री सारस्वत सागरजी के प्रवचन नित हो रहे हैं। इसमें वे धर्म प्रभावना कर रहे हैं। गुरुवार को मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में आनंद से रहने के लिए दिन-रात विचार करते रहते हैं और नए-नए कर्म को करने का प्रयास करते हैं, कुछ प्रयासों में हम सफल हो जाते हैं, जो प्रयास करने के उपरांत असफलता आती है। वह हमारे विकास में बाधक बनती है।
हमारे उत्साह को अनुत्साह में बदल देती है। हमें अनुत्साही नहीं होना है तो जितना हमने किया या जितना हुआ उसमें अपने आपको संतुष्ट कर लो। यदि संतुष्ट नहीं किया और आगे सफलता मिली नहीं तो नियम से हीनता-दीनता का मुख देखना पड़ेगा। आप अनेक लोगों से सलाह ले सकते हो परंतु, पुरुषार्थ आपको स्वयं करना होगा। पूरा मनोयोग के साथ, वचनयोग के साथ और काययोग के साथ तब आपलोग कहीं सफलता प्राप्त कर सकते हो। समर्थ बन सकते हो।













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