जीवन एक फूलों का बगीचा है। इसे बोझ की तरह मत जियो। फूल के साथ जो कांटे हैं, वह परीक्षाओं के हैं। परीक्षाओं को कुशलता से पास करो। फूल ही फूल बहार बन जाएंगे। ये उद्गार गुमास्ता नगर स्थित धर्म सभा में आर्यिका सुनयमती माताजी ने प्रकट किए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..
इंदौर। जीवन एक फूलों का बगीचा है। इसे बोझ की तरह मत जियो। फूल के साथ जो कांटे हैं, वह परीक्षाओं के हैं। परीक्षाओं को कुशलता से पास करो। फूल ही फूल बहार बन जाएंगे। ये उद्गार गुमास्ता नगर स्थित धर्म सभा में आर्यिका सुनयमती माताजी ने प्रकट किए। समस्याओं के बारे में बताते हुए माताजी ने कहा कि समस्याएं चिंता का विषय बन जाती हैं। यदि उनका सामना साहस और सहजता से करें तो वे उपहार लेकर सामने आएंगी।
इस अवसर पर समाज के गणमान्य नागरिक सौरभ जैन, मनोज जैन, विकास जैन,आकाश जैन, रेखा जैन आदि श्रावक उपस्थित थे। संचालन सुभाष सेठिया ने और मंगलाचरण हितिका जैन ने किया। सायंकालीन सभा में आनंद यात्रा के पश्चात क्षुल्लक सुपर्वसागर महाराज ने प्रश्न मंच के माध्यम से ज्ञान वर्धन किया।













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