समय और सांस का कोई भरोसा नहीं हैं, ये दोनों ही निकल जाएं तो वापिस नहीं आते । श्वास तो कर्मो के अधीन हैं, लेकिन समय को हम पकड़ सकते हैं, समय के अनुरूप चल सकते हैं । यदि समय निकल गया या समय का हमने सही ढंग से उपयोग नहीं किया तो हमारे पास पछतावें के अलावा कुछ नहीं बचता। समय का ही नाम काल है, जिसे सुनकर हम भयभीत हो जाते हैं । हमारी नजर ही हमारा नजरिया तय करती है पढि़ए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट ……
मुरैना । समय और सांस का कोई भरोसा नहीं हैं, ये दोनों ही निकल जाएं तो वापिस नहीं आते । श्वास तो कर्मो के अधीन हैं, लेकिन समय को हम पकड़ सकते हैं, समय के अनुरूप चल सकते हैं । यदि समय निकल गया या समय का हमने सही ढंग से उपयोग नहीं किया तो हमारे पास पछतावें के अलावा कुछ नहीं बचता। समय का ही नाम काल है, जिसे सुनकर हम भयभीत हो जाते हैं । हमारी नजर ही हमारा नजरिया तय करती है । हम किसे किस नजर से देख रहे हैं । यदि आध्यात्मिक दृष्टि से देख रहे हैं तो पापों से बच सकते हैं ।
यदि सांसारिक दृष्टि से देख रहे हैं तो संसार बढ़ता है और यदि वासना की दृष्टि से देख रहे हैं तो पाप का आश्रव होता है । हमें अपनी नजर व नजरिया अच्छा रखना चाहिए । हमें अपना चिंतन सही रखना चाहिए । हमारी नजर, हमारा नजरिया, हमारी सोच सही होगी, तभी हम सही मार्ग पर आगे बढ़ेंगे । मुनिश्री शिवानंद जी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रवचन दिया।श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर में एक दिन के अल्प प्रवास पर आचार्य वसुनंदी जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्री शिवानंद जी महाराज एवं प्रश्मानंद जी महाराज का मंगल आगमन हुआ ।
जैन समाज मुरैना द्वारा युगल मुनिराजों की भव्य अगवानी की गई । बड़े जैन मंदिर की धर्मसभा में सैकड़ों की संख्या में बंधुवर, माताएं एवं युवा साथी उपस्थित रहे । शाम को पूज्य युगल मुनिराजों ने मुरैना से श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिरी के लिए मंगल पद विहार किया ।













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