8 मार्च को पूरे विश्व में महिलाओं को समर्पित यह दिवस बहुत खास है। इस खास दिवस पर नारी के उपकारों को स्मरण करने का समय है। नारी को आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है। महिलाओं के बिना सृष्टि का संचालन ही संभव नहीं है। महिलाओं को समर्पित विचाराभिव्यक्ति पढ़िए अभिषेक जैन लुहाडिया की कलम से…
रामगंजमंडी। आज हम विश्व महिला दिवस मना रहे हैं। इसे मनाना निश्चित रूप से सार्थक है। नारी वो शक्ति है, जो जीवन का उद्धार करती है। जीवनदायिनी है यदि देखा जाए तो भारत ऐसा राष्ट्र है। जहां नारी को देवी के रूप में पूजा जाता है। नारी स्वाभिमान है। नारी गौरव है। यदि हम देखे आज की नारी अबला नहीं है। नारी आज हर कार्य कर रही है। यदि परिवार पर जिम्मेदारी उठाने का समय आता है तो ऑटो रिक्शा तथा ट्रेन तक चलाने लगती है और साहस के साथ चलते हुए अंतरिक्ष को भेदकर वायुयान तक उड़ाने लगी है। आज देखे तो हमारे भारत देश की प्रथम नागरिक भी महिला राष्ट्रपति है। नारी बलिदान का रूप है। देश की आज़ादी मंे बलिदान करने वाली रानी लक्ष्मीबाई जिनके लिए कहा जाता है ‘खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी।’ नारी अर्पण और समर्पण का प्रमाण है। ममता की बात की जाए तो नारी ममता की खान है। वो यामिनी-दामिनी और इस संपूर्ण ब्रह्मांड का मान है। एक नारी है जो माता बनकर सृष्टि सजाती है। यदि नारी नहीं तो यह संसार सूना-सूना ही होगा। कहा जाता है ‘जग सूना-सूना लागे र‘े। नारी अगर घर में न हो तो घर वीरान सा लगता है। निश्चित रूप से संसार, घर, परिवार की शान नारी है।
क्या खूब कहा है
तेरे प्यार की छाया में ही पाया सबने रूप,
जो भी दिखता है इस सृष्टि में सब है तेरा स्वरूप,
हे! नारी तुम रखती हो निज कितने ही रूप,
जननी, सुता, भगिनी, भार्या, मां अंबे का स्वरूप
नारी तुम प्यार की मूरत, रिश्ते-नातों का आधार।
रक्षा इनकी करो सदा ही, पर सहना मत अत्याचार।।
जो लोग दबाना चाहें तुमको, रहो विरोधी हो तैयार।
फूलों बदले फूल चढ़ाना, शूलों को शूलों का हार।।
जो भी देखे तुच्छ नयन से,रणचंडी का लो अवतार।।
चारों ओर दरिंदे बैठे, लाचारी पर करने वार।
बिजली बनके तुम टूट पड़ो, खंडित करो धरा का भार।।













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