गुरू का पोज होता है पोजिशन भक्त की होती है, गुरू तभी खुश होता है जब उसके भक्त की पोजिशन बनती है। अच्छी पोजिशन बनानें के लिए अच्छा पोज चाहिए, एक महाशक्ति की आवश्यकता है महान पुण्य की आवश्यकता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
महरौनी ( ललितपुर)। आध्यात्म जगत के सूर्य कहे जाने वाले आचार्य भगवन् विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज और क्षुल्लक गम्भीर सागर जी महाराज का मंगल आगमन जैसे ही उत्तर प्रदेश की सीमा में हुआ भक्तजनों के चेहरों पर खुशियां ही खुशियां छा गई। टीकमगढ़ रोड स्थित श्री सुधासागर वेयर हाउस टोल प्लाजा मे रात्रि विश्राम के बाद शनिवार की सुबह 6 बजे मुनिश्री सुधासागर का मंगल विहार महरौनी की ओर हुआ।
सिर पर कलश रख महिलाओं ने गाए मंगलगीत
ग्राम खिरिया नाका और ग्राम निवारी में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और पुरुष दर्शन के लिए उमड़े और उन्होंने मुनिश्री का पाद प्रच्छालन कर आशीर्वाद लिया। महिलाएं आगवानी के लिए सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गा रही थी। आनंदपुर ट्रस्ट अंखड धाम आश्रम के महात्मा अघटयुक्ति आनंद और अखंड धाम के सेवादारों ने मुनिश्री की मंगल आगवानी की और आशीर्वाद प्राप्त किया।
भक्तों ने किया पाद प्रच्छालन, उतारी आरती
विद्यासागर दाल मिल पर बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरूषो ने आकर मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ की मंगल आगवानी की। फिर एक भव्य शोभायात्रा के रूप में मुनि संघ नगर की ओर बढ़ चला। द्वार द्वार पर भक्तजनों ने पाद प्रच्छालन और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया,नगर में हर व्यक्ति मुनिश्री के दर्शन को लालयित दिखा। पहले मुनिश्री ने श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर जाकर मूलनायक भगवान अजितनाथ के दर्शन किए उसके बाद शोभायात्रा नगर के गांधी चौक, इंदिरा चौराहे होते हुए श्री पार्श्वनाथ यशोदय तीर्थ पहुंची जहां दिगम्बर जैन कमेटी और यशोदय तीर्थ कमेटी ने पाद प्रच्छालन कर अगवानी की।
नगर को रंगोली से सजाया
आपको बता दें कि मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आगमन के लिए नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। सारे नगर में नगर पंचायत की ओर से साफ सफाई कराई गई और युवाओं ने पूरे नगर को रंगोली और रंग-बिरंगी पट्टियों से सजा दिया था।
अच्छी पोजिशन के लिए चाहिए अच्छा पोज
मुनिश्री सुधासागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सूर्य अपनी रोशनी का उपयोग स्वयं नहीं करता ,नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती ,वृक्ष अपने फल नहीं खाता इसी प्रकार संतो की विभूति होती है वह श्रावकों के लिए होती हैं। गुरु का पोज होता है पोजिशन भक्त की होती है, गुरु तभी खुश होता है जब उसके भक्त की पोजिशन बनती है। अच्छी पोजिशन बनानें के लिए अच्छा पोज चाहिए, एक महाशक्ति की आवश्यकता है महान पुण्य की आवश्यकता है।
महरौनी को बनाएं यशोदय तीर्थ
उन्होंने कहा कि अभी मौका है महरौनी की पोजीशन बनाने की इसके लिए भव्य यशोदय तीर्थ बना दो। कार्यक्रम के पूर्व मुनिश्री का पाद पच्छालन करने का सौभाग्य चक्रेश प्रमोद चौधरी को प्राप्त हुआ । मुनिश्री सुधासागर जी की आहारचर्या चक्रेश चौधरी और क्षुल्लक गम्भीर सागर की आहारचर्या का सौभाग्य रतन चंद्र डोगरया महेन्द्र पठावाले को प्राप्त हुआ। संचालन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश और अमित शास्त्री जबलपुर ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष कोमल चंद्र सिंघई, ललितपुर जैन समाज अध्यक्ष अनिल अंचल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह, प्रेमनारायण सोनी एडवोकेट ,श्री अनौरा, राजेंद्र जैन थनवारा, राजेंद्र चौधरी टीकमगढ़,राजा कारी, यशोदय तीर्थ अध्यक्ष राजा चौधरी,गौरव अध्यक्ष प्रशांत सिंघई वंटी, प्रमोद सिंघई,राजू नुना , अनिल मिठया, मुकेश सराफ, निशांत जैन, ओमप्रकाश भदौरा,कमल, दुष्यंत बड़ोनिया, डॉ. हरगोविंद राय ,पवन मोदी,अनिल बड़ोनिया,रमेश सिंह परिहार,भोले दुबे,सौरभ राजा ,रवि राजा , पुनीत पटवा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। वहीं कोतवाली प्रभारी प्रमोद कुमार और नगर इंचार्ज विनीत सिंह दल-बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।













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