आर्यिका मां श्री 105 विश्रेयश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि सप्त भय से सम्यक दृष्टि रहित होता है। सप्त भय इस प्रकार हैं इहलोकभय, परलोक भय, आकस्मिक भय, वेदना भय, मरण भय, अरक्षाभय, अगुप्तीभय, अगर हर प्राणी अपने जीवन में सब जीवों की रक्षा करें। पढिए एक रिपोर्ट…
डबरा। आर्यिका मां श्री 105 विश्रेयश्री माताजी ने श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर कस्टम रोड जवाहर गंज डबरा में अपने प्रवचन में कहा कि सप्त भय से सम्यक दृष्टि रहित होता है। सप्त भय इस प्रकार हैं इहलोकभय, परलोक भय, आकस्मिक भय, वेदना भय, मरण भय, अरक्षाभय, अगुप्तीभय, अगर हर प्राणी अपने जीवन में सब जीवों की रक्षा करें तो किसी जीव को किसी प्रकार का कोई भय ना रहे जैसे रानी अनंगसरा ने अजगर को अभयदान दिया तो अगले भव में रानी विशलया बनीं।
अभय दान के प्रभाव से उसके शरीर के स्नान का जल औषधि का काम करता था। जो प्राणी अपनी इंद्रियों को जीत लेगा तो उससे किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होगी और ना ही प्राणी किसी जीव को भयभीत करेगा। सभी जीवो से मैत्री भाव रखें और द्रव्य व भावों से भी जीवो को अभय दान दें।
इसी से हमारा कल्याण हो जाएगा। प्रवचन के उपरांत राजस्थान राजाखेड़ा से आए सकल जैन समाज की महिलाएं एवं पुरुष ने माताजी को राजाखेड़ा में चातुर्मास कराने के लिए श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। इस अवसर पर मनोज, भूपेंद्र, अंकित, युवांग, ललितेश, रक्षा, रिंकी, ऊषा, ममता, पूनम, संगीता, मुन्नी देवी, रीतु,रीता, महेंद्री, मनोरमा राजाखेड़ा जैन समाज के धर्म प्रेमी बंधु उपस्थित थे। डबरा जैन समाज की आदिनाथ महिला मंडल ने सभी अतिथि गणों का सम्मान पटटिका एवं माला पहनाकर सम्मान किया।













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