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हर धोखा एक पाठ है और हर पाठ नई शक्ति देता है : मुनि श्री ने धोखेबाजों से सावधान रहने की सलाह दी


पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ विदिशा में विराजमान हैं। यहां पर मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन भी हो रहे हैं। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन यहां आ रहे हैं। मुनि श्री ने धोखेबाजों से सावधान रहने की सलाह दी है। विदिशा से पढ़िए, अभिषेक आशिक पाटिल की यह खबर


विदिशा। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ विदिशा में विराजमान हैं। यहां पर मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज के प्रवचन भी हो रहे हैं। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन यहां आ रहे हैं। मुनि श्री ने धोखेबाजों से सावधान रहने की सलाह दी है। भिंड के अरिहंत जैन ने बताया कि यहां चल रहे प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि अरे भाई! दिल धोखे में है और धोखेबाज दिल में है। दिल जब किसी पर भरोसा करता हैतो वो आंखों से नहीं भावनाओं से देखता है लेकिन, जब वही दिल धोखे में आ जाता है तब आँखें खुलती हैं और समझ आती है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि भरोसा करना छोड़ दो। इसका मतलब ये है कि सीखो कि किस पर भरोसा करना है।

धोखा देने वाला तो कुछ पल का खिलाड़ी होता है पर धोखा सहने वाला इंसान अगर टूटे नहीं तो वो जीवन का असली विजेता बनता है। मुनि श्री ने कहा कि हर धोखा एक पाठ है और हर पाठ एक नई शक्ति देता है। तो ऐ दिल! तू दु:खी मत हो। तू टूटा नहीं है, तू मजबूत हुआ है। अब तू जानता है कि किसे जगह देनी है और किसे खुद से दूर रखना है। अंत में बस यही कहूँगा: ‘जो दिल तोड़ते हैं, उन्हें माफ कर दो और जो दिल जोड़ते हैं, उन्हें कभी मत खोओ।’

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