जिला अस्पताल में गंभीर मरीज के लिए जब रक्त की जरूरत आन पड़ी तब रक्त वीरांगना नम्रता जूली कारी को कॉल किया। उन्होंने तुरंत रक्तदान की स्वीकृति दी। मूसलाधार बारिश के बावजूद वे ब्लड बैंक पहुंची और समय पर रक्तदान कर मरीज का जीवन बचाया। नम्रता संस्था की हमेशा ही मानव सेवा में अग्रणी रहती हैं। टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर…
टीकमगढ़। मंगलवार को शाम लगभग 7.30 से रात 9बजे तक तेज़ बारिश होती रही। इसी दौरान शहर के एक निजी नर्सिंग होम से आपातकालीन सूचना मिली कि गर्भवती महिला गायत्री ठाकुर को प्रसव पूर्व तत्काल एबी पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता है। जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में इस ब्लड ग्रुप में उपलब्धता नहीं थी। स्थिति गंभीर होने पर इशानिका मेमोरियल फाउंडेशन को सूचना दी गई। संस्था ने तत्परता दिखाते हुए लगभग पांच डोनरों से संपर्क किया, लेकिन संयोगवश वे सभी शहर से बाहर थे। इसी बीच जैसे ही छठे डोनर के रूप में रक्त वीरांगना नम्रता जूली कारी को कॉल किया गया, उन्होंने बिना एक क्षण गंवाए तुरंत रक्तदान की स्वीकृति दी।
मूसलाधार बारिश के बावजूद वे अपने एक्टिवा से ब्लड बैंक पहुंची और समय पर रक्तदान कर मरीज का जीवन बचाया। नम्रता जूली कारी संस्था की एक समर्पित एवं सक्रिय सदस्या हैं, जो हर सेवा कार्य में अग्रणी रहती हैं। उनके साथ उनके पति अमित कारी भी नियमित रूप से रक्तदान करते हैं। यह युगल टीकमगढ़ में ‘रक्तवीर दंपति’ के रूप में प्रसिद्ध है और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इशानिका मेमोरियल फाउंडेशन ने इस पुनीत कार्य के लिए नम्रता जूली कारी एवं उनके पति अमित को साधुवाद देते हुए कहा कि रक्तदान ही सच्ची मानवता है और इस दंपति ने तेज बरसात में भी सेवा का दीप जलाकर सबके लिए मिसाल कायम की है। फेडरेशन ने कहा कि जब भावना बड़ी होती है तो प्रतिकूल मौसम भी सेवा में बाधक नहीं बनता। रक्तदान तो जीवनदार है। इसलिए ही इसे महादान कहा गया है।













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