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समाज सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित : जैन कल्याण बोर्ड की स्थापना समय की आवश्यकता है – डॉ. योगभूषण महाराज


मंत्र महर्षि, धर्मयोगी संत क्षुल्लक (डॉ.) श्री योगभूषण जी महाराज ने एक प्रेस वार्ता के दौरान जैन समुदाय के भविष्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जैन समुदाय के सर्वांगीण विकास एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जैन कल्याण बोर्ड की स्थापना करनी चाहिए। जैन समुदाय भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अपने अनुशासन, धार्मिक आस्थाओं और शांति-सद्भाव के प्रति समर्पण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। पढ़िए यह रिपोर्ट…


इंदौर। मंत्र महर्षि, धर्मयोगी संत क्षुल्लक (डॉ.) श्री योगभूषण जी महाराज ने एक प्रेस वार्ता के दौरान जैन समुदाय के भविष्य के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जैन समुदाय के सर्वांगीण विकास एवं सांस्कृतिक संरक्षण के लिए जैन कल्याण बोर्ड की स्थापना करनी चाहिए। जैन समुदाय भारतीय समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अपने अनुशासन, धार्मिक आस्थाओं और शांति-सद्भाव के प्रति समर्पण के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। जैन समुदाय ने देश के आर्थिक विकास में भी अहम योगदान दिया है और इसे सबसे अधिक करदाता होने का गौरव भी प्राप्त है। अति-अल्पसंख्यक होते हुए भी जैन समुदाय की झोली में इतनी सारी उपलब्धियां हैं, परंतु फिर भी यह समाज सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से अकसर वंचित रहता है।

वक्फ बोर्ड की तरह हो व्यवस्था

श्री योगभूषण महाराज ने कहा, “जब उनके लिए वक्फ बोर्ड हो सकता है, तो अति-अल्पसंख्यक जैन समुदाय के लिए जैन कल्याण बोर्ड क्यों नहीं हो सकता?” वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की संपत्ति और धार्मिक संस्थानों की देखरेख करता है, उसी प्रकार जैन कल्याण बोर्ड जैन समुदाय की धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए काम करेगा। इसका उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और देखभाल करना होगा, बल्कि यह बोर्ड जैन समुदाय के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय में सहायता प्रदान करने के लिए भी योजनाएं बना सकता है। जैन समुदाय ने सदैव व्यापार, उद्योग और वित्तीय क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। उनके योगदान ने न केवल देश की आर्थिक प्रगति को प्रोत्साहित किया है, बल्कि समाज में शांति और अहिंसा के संदेश का भी प्रसार किया है। ऐसे समुदाय के लिए एक विशेष कल्याणकारी बोर्ड की स्थापना सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए, ताकि उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उचित योजनाएं बनाई जा सकें।

वक्फ बोर्ड की तरह, जैन कल्याण बोर्ड का गठन न केवल न्यायसंगत है, बल्कि यह सामाजिक समानता और धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों को भी मजबूत करता है। यह समय की मांग है कि जैन समुदाय की विशेष पहचान और उनके योगदान को सम्मानित करते हुए एक समर्पित बोर्ड की स्थापना की जाए, जो उनकी सुरक्षा, उन्नति और विकास की दिशा में कारगर कदम उठाए।

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