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श्री ज्ञानमती माताजी का हीरक वर्षायोग स्थापना : भगवान ऋषभदेव का पंचामृत अभिषेक किया


 भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज में गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का हीरक वर्षायोग स्थापना शाश्वत तीर्थ में हुआ। इए अवसर पर पंचामृत अभिषेक किया गया। विश्व शांति की कामना से शांतिधारा की गई। अयोध्या से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटिल की खबर…


अयोध्या। श्री भगवान ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ का हीरक वर्षायोग स्थापना शाश्वत तीर्थ में हुआ। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी वर्तमान में सर्वाधिक चातुर्मास करने वाली एकमात्र साध्वी हैं। पूरे देश में माताजी का 73वां हीरक वर्षायोग स्थापना का कार्यक्रम शाश्वत तीर्थ अयोध्या में समारोह में हुआ। जिसमें सर्व प्रथम प्रात:काल भगवान ऋषभदेव की मूलनायक 31 फीट उत्तुंग प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया गया। विश्व शांति की कामना से शांतिधारा की गई। मध्याह्न में चातुर्मास स्थापना की मुख्य सभा का आयोजन किया गया।

इन्होंने किया दीप प्रज्वलन

जिसमें सुभाषचंद जैन सर्राफ के मंगलाचरण से समारोह का शुभारंभ किया गया एवं आए हुए अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से जमनालाल हपावत-मुम्बई, अशोक चांदवड-जयपुर, अनिल जैन (संघपति)-दिल्ली, प्रमोद कासलीवाल-औरंगाबाद, सौ. सपना जितेन्द्र लुहाडिया-खण्डवा, अमरचंद जैन सर्राफ-टिवैतनगर, लखनऊ, विजय कुमार जैन जम्बूद्वीप हस्तिनापुर, डॉ. जीवन प्रकाश जैन आदि उपस्थित हुए।

इंद्रसभा का आयोजन किया

प्रतिष्ठाचार्य श्री विजय जैन जी ने बताया कि संस्थान के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्र कीर्ति स्वामीजी ने अयोध्या क्षेत्र के विकास एवं जीर्णोद्धार की बात सभी को बताई। माताजी के 73 वें वर्षायोग के अवसर पर पधारे। सभी भक्तों का स्वागत एवं सम्मान किया गया एवं इन्द्रसभा का आयोजन किया गया। जिसमें सौधर्म इन्द्र बनने का सौभाग्य जितेन्द्र सपना लुहाडिया को प्राप्त हुआ एवं किस प्रकार से इन्द्रगण भी माताजी के चातुर्मास की चर्चा कर रहे हैं। इस बात को दर्शाया गया। प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि माताजी ने आज तक कभी भी वर्षायोग कलश की स्थापना नहीं की चूँकि आचार्य वीरसागर जी, आचार्य श्री शिवसागर जी व आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज ने कभी वर्षायोग कलश की स्थापना नहीं की। आगम के अंदर वर्णित विधि से भक्ति पाठ आदि करके रात्रि के प्रथम प्रहर में विधिवत चातुर्मास स्थापना जैसे शास्त्रों में वर्णित है उसी प्रकार से की।

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