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आचार्य विमर्श सागर जी ससंघ के चातुर्मास कलश की स्थापना : उत्तरप्रदेश सरकार शीघ्र देगी आचार्य श्री संघ को राज्य अतिथि का दर्जा


आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज का गुरुवार को 30 जैन संत और आर्यिकारत्न का श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना दिवस भव्यता से धार्मिक परंपराओं और रीतियों के अनुरूप हुआ। सहारनपुर धरा वैसे तो उस समय ही पावन हो उठी जब एक साथ 30 मयूर पिच्छिका का पदार्पण सहारनपुर में हुआ। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


सराहनपुर। आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज का गुरुवार को 30 जैन संत और आर्यिकारत्न का श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना दिवस भव्यता से धार्मिक परंपराओं और रीतियों के अनुरूप हुआ। सहारनपुर धरा वैसे तो उस समय ही पावन हो उठी जब एक साथ 30 मयूर पिच्छिका का पदार्पण सहारनपुर में हुआ। उनके दर्शनों का पुण्य अर्जन करने के लिए लाखों की संख्या में लोग उमड पड़े। हर कोई उनकी आरती कर पद प्रक्षालण कर पुण्य को अर्जन कर लेना चाहता था। महिलाओं ने तो नृत्य कर संतों का अभिनंदन किया। वहीं चातुर्मास कलश स्थापना दिवस पर श्रद्धालुओं की ही नहीं बल्कि नौ राज्यों से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई थी। दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब आदि कई राज्यों से श्रद्धालु सुबह से ही आना शुरू हो गए थे और आचार्य श्री के जयकारों से वातावरण गूंजायमान हो उठा था। मुख्य कलश विमर्श सागर दिल्ली परिवार ने जबकि अन्य तीन कलश जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, उपाध्यक्ष विपिन जैन और तीसरा कलश अविनाश जैन नाटी उपमंत्री ने लिया।

विधायक राजीव गुंबर, महापौर डॉ. अजयसिंह ने अपने पार्षदों के साथ कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराई और आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। बता दें कि सहारनपुर के इतिहास में यह पहली बार है जब 30 मयूर पिच्छिका एक साथ सहारनपुर के जैन मंदिर में विराजमान हैं। 30 जैन संत और आर्यिका रत्न का जैन बाग स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य कार्यक्रम का प्रारंभ जैन संत के अगवानी तथा ध्वजारोहण से हुआ। गुरु पूर्णिमा महापर्व के साथ सहारनपुर धर्मनगरी को विशाल संघ के साथ आचार्य श्री 108 विमरसागर जी (ससंघ 30 पिच्छी) का वर्ष 2025 का मंगलमय चातुर्मास कराने का महासौभाग्य प्राप्त हुआ।

दो बालिकाओं ने त्याग तपस्या का संकल्प लिया

जैनबाग प्रांगण में प्रातःकाल की मंगल बेला में गुरुपूर्णिमा महापर्व के साथ आचार्यसंघ के मंगलमय चातुर्मास की मंगलमय कलश स्थापना हुई। विशाल धर्म सभा के मध्य मंगलाचरण द्वारा सभा आरंभ हुई। चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन के साथ आचार्य गुरुवर के चरण कमलों का प्रक्षालन छिंदवाड़ा मप्र से पधारे ‘जिनागम पंथी यमन जैन’ द्वारा एवं शास्त्र भेंट दिल्ली से पधारे जिनागम पंथी टीनू जैन द्वारा किया गया। आचार्यश्री के संघ अनुशासन, वात्सल्य एवं निर्दाेष चर्या से प्रभावित होकर दिल्ली कृष्णा नगर के जैन परिवार मूलचंद जैन की सुपुत्री सिद्धि जैन एवं उपेन्द्र जैन की सुपुत्री ईशा जैन इन दोनों ने अपने घर-परिवार संसार से मोह त्यागकर आचार्य श्री की शरण में आत्म-समर्पण किया। गुरुपूर्णिमा महापर्व से ये दोनों ही बालिकाएं त्याग-साधना पूर्वक अपना आगामी जीवन सार्थक करते हुए आध्यात्मिक ऊंचाईयों को प्राप्त करेंगी।

विधायक और मेयर ने की कलश स्थापना की अनुमोदना 

मंगल कलश स्थापना की अनुमोदना करने सहारनपुर नगर के मेयर डॉ. अजयसिंह एवं नगर विधायक राजीव गुंबर ने आचार्य श्री के चरणों में उपस्थित होकर गुरुवर के श्री चरणों में अपनी भावांजलि समर्पित की। आचार्य श्री ने दोनों ही राजनेताओं को अपना शुभाशीष प्रदान किया। नगर विधायक राजीव गुंबर ने कहा कि आचार्य श्री का आशीर्वाद मिलना ही अपने आप में बहुत बड़ा सौभाग्य है और वह इसके लिए अपने भाग्य को सराहते हैं। महापौर अजय सिंह ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल भेंट करते हुए कहा कि आचार्य श्री अपने त्याग ज्ञान के साथ-साथ अहिंसा परमो धर्म के लिए पूरे विश्व में पूजनीय है। जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन ने कहा कि सहारनपुर के इतिहास में पहली बार जैन संतों का संघ सहारनपुर नगर मे आगमन हुआ है। यह निश्चित ही यहां के प्रत्येक व्यक्ति के पुण्य का फल है कि हमें अपने ज्ञान की पिपासा शांत करने का अवसर मिला है। उन्होंने बाहर से आए सभी व्यक्तियों का सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। जैन समाज के संरक्षक और भाजपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष राकेश जैन ने कहा कि यह बहुत बड़ा सौभाग्य है कि हमें अपने चक्षुओं से जैन संतों का त्याग तपस्या उनकी जीवनचर्या देखने को मिलती है।

महागुरु के रूप में तीर्थंकर प्रभु महावीर स्वामी को प्राप्त किया

धर्मसभा में आचार्यश्री ने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा महापर्व है। आज के दिन वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी को एक महान शिष्य इंद्रभूति गौतम की गणधर परमेष्ठी के रूप में प्राप्ति हुई थी। तीर्थकर भगवान की दिव्य वाणी मुख्य गणधर के नहीं खिरती है। वहीं दूसरी दृष्टि से देखें तो एक महा मिथ्यात्वी अज्ञानी जीव ने अपने अज्ञानता को छोड़कर, मिथ्यात्व को त्यागकर जगत् के महागुरु के रूप में तीर्थंकर प्रभु महावीर स्वामी को प्राप्त किया था। इसीलिए मैं कहता हूं कि आज तो यथार्थ में शिष्य पूर्णिमा है क्योंकि, श्आज एक भव्य प्राणी परमगुरु, महागुरु को पाकर पूर्णता को प्राप्त हुआ था। वे महागुरु महावीर स्वामी तो पूर्व से ही पूर्ण थे। आज तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी, गुरु एवं हमारे दीक्षा-शिक्षा प्रदाता आचार्यश्री विरागसागर जी के चरण कमलों में अनंत गुण भक्ति सहित वंदन आराधन करते हैं।

इन्होंने लिया कलश स्थापना का सौभाग्य 

आचार्य संघ के मंगल चातुर्मास का मुख्य कलश राजधानी दिल्ली के अनुभव-अनुराग जैन ‘अहिंसा विमर्श परिवार’ ने एक बड़ी राशि दान में लेकर स्थापित करने का महासौभाग्य प्राप्त किया जबकि, अन्य तीन कलश पांच लाख पचपन हजार के हिसाब से जैन समाज के अध्यक्ष राजेश कुमार जैन, उपाध्यक्ष विपिन जैन चांदी वाले और तीसरा कलश अविनाश जैन नाटी लेने वाले सौभाग्य शाली बने। जबकि अन्य 40 कलश 1 लाख 21 हजार के हिसाब से समाज के अन्य प्रमुख लोगों ने लिए। आचार्य श्री ने अपने चार माह के प्रवास की सीमा 50 किमी की निर्धारित की। आगामी चार माह में सहारनपुर के श्रावक-श्राविकाएं विभिन्न प्रकार से ज्ञान-तप-आराधना में संलग्न रहेंगे।

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