भारतवर्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों, विशेष रूप से तीर्थक्षेत्रों और मंदिरों के संवर्धन, संरक्षण और सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह बयान भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के अध्यक्ष डीके जैन ने हाल ही में एक संदेश के माध्यम से दिया। अध्यक्ष ने मंदिरों के दस्तावेजीकरण की अहमियत पर प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि सभी मंदिरों, धार्मिक स्थलों और समुदायों को अपने संबंधित ट्रस्ट डीड, पैन कार्ड, और देवस्थान विभाग में पंजीकरण करवाना चाहिए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। भारतवर्ष के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों, विशेष रूप से तीर्थक्षेत्रों और मंदिरों के संवर्धन, संरक्षण और सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया गया है। यह बयान भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के अध्यक्ष डीके जैन ने हाल ही में एक संदेश के माध्यम से दिया। अध्यक्ष ने मंदिरों के दस्तावेजीकरण की अहमियत पर प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि सभी मंदिरों, धार्मिक स्थलों और समुदायों को अपने संबंधित ट्रस्ट डीड, पैन कार्ड, और देवस्थान विभाग में पंजीकरण करवाना चाहिए।
इस कदम से मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अनाधिकृत कब्जे और विवादों से बचा जा सकता है, खासकर यदि ये स्थल वर्षों पुरानी या सिद्ध क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा, “चाहे वह पुराना मंदिर हो या नया, उसकी भूमि और संपत्ति के कागजात संभालकर रखने चाहिए। यदि किसी समाज के पास धार्मिक, सामाजिक या पारमार्थिक कार्यों के लिए भूमि है, तो उस पर भी ट्रस्ट डीड और पैन नंबर बनवाए जाएं।” इसके अलावा, यदि किसी मंदिर की जमीन सरकारी अधिग्रहण में आ रही है, तो भी इन दस्तावेजों का होना आवश्यक है।
अध्यक्ष ने यह भी सुझाव दिया कि जब किसी मंदिर की कमेटी का कार्यकाल समाप्त हो और नई कमेटी कार्यभार संभाले, तो पुरानी कमेटी को सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक रूप से सौंपने चाहिए, ताकि कोई कानूनी समस्या उत्पन्न न हो। उन्होंने विशेष रूप से जैन मंदिरों के संदर्भ में चिंता जताई, जहां करोड़ों की लागत से निर्माण या जीर्णोद्धार होता है, लेकिन विधिक दस्तावेजों की कमी के कारण मंदिरों पर कब्जा हो जाता है या उन्हें नुकसान पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा, “संस्कृति को बचाने के लिए जरूरी है कि मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दस्तावेज पूरी तरह से संरक्षित और सुरक्षित किए जाएं।”
अध्यक्ष ने अपने संदेश में कहा कि समाज के सभी सदस्यों को इस जिम्मेदारी को समझते हुए अपने धार्मिक स्थलों के दस्तावेज़ तैयार करवाने और उन्हें सुरक्षित रखने में सहयोग देना चाहिए। उन्होंने इस कार्य के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं से मार्गदर्शन लेने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति और धार्मिक धरोहरों का संरक्षण हमारे सभी का दायित्व है।”













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