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एक सांस में 24 तीर्थंकरों के नाम बोल देती है गव्या : ढ़ाई साल की उम्र में संस्कारों से परिपूर्ण बच्ची बनी कौतूहल का विषय


पुरानी कहावत है कि कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही नज़र आते हैं। डूंगरपुर जिले के पीठ गांव की नन्हीं बच्ची गव्या इसी कहावत को चरितार्थ कर रही है। ढ़ाई साल की उम्र में इस बच्ची में जैन संस्कार इतने हैं कि जैन समाज के चौबीस तीर्थंकरों के नाम उसे याद है और महज़ 52 से 60 सैकैंड में एक ही सांस में सुना देती है। पढ़िए नन्हीं गव्या की यह ख़बर …


उम्र और संस्कारों का मेल ज़रूरी नहीं है कि सिर्फ समझदार होने पर ही आए। नन्हीं बच्ची, ढ़ाई साल की कच्ची उम्र में जैन तीर्थंकरों के नाम जिस स्पष्टता और तत्परता से लेती है, उसे देखकर मन आल्हादित हो जाता है । इन नामों को इस बच्ची ने इस तरह कंठस्थ कर लिया है कि पूरे नाम सिलसिलेवार बोलने में गव्या को महज़ 52 से 60 सैंकेंड का ही समय लगता है। पहले तीर्थंकर आदिनाथ भगवान से लेकर २४ वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के नाम आसानी से बोल लेती है। यहां तक की क्रम से ही नहीं बल्कि बिना क्रम से सिर्फ ये पूछा जाए कि 16 वें तीर्थंकर कौनसे हैं तो तुरंत जवाब आता है भगवान शांतिनाथ,इसी तरह 24 वें तीर्थंकर के बारे में सीधे पूछे जाने पर भगवान महावीर का नाम तुरंत नन्हीं बच्ची की ज़ुबान पर आ जाता है।

 

इस बच्ची को कुछ भगवान के चिन्ह भी याद हैं । इस बच्ची की माता सुरभि जैन बताती हैं कि उसे दो तीन बार भगवान के नाम याद करवाए थे तब से उसे ये अच्छे से याद हैं । गव्या ने दो साल की उम्र से णमोकार महामंत्र भी बोलना शुरू कर दिया था वो भी अब तक उसे कंठस्थ याद है । जिन संस्कृति में पली-बढ़ी,इस नन्ही बच्ची की मीठी बोली में जैन तीर्थंकरों के नाम और णमोकार मंत्र जो भी सुनता है वो विस्मय मिश्रित खुशी को जताए बिना नहीं रहता। गव्या के संस्कार उनके परिवार की देन है और परिवार के इन्हीं संस्कारों के प्रति श्रीफल जैन न्यूज़ अपनी कृतज्ञता प्रकट करता है। जैन परिवारों में ऐसे ही संस्कारों की ज़रूरत है ।

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