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अष्टाहिंका महापर्व का तीसरा दिन : अहंकार नरक का द्वार है – आचार्य प्रमुख सागर


स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधन करते हुए कहा कि अहंकार झुकने नहीं देता है, दूसरों को झुका देता है और विनयवान हमेशा झुक कर काम करता है। पढ़िए सुनील सेठी की रिपोर्ट…


गुवाहाटी। स्थानीय फैंसी बाजार स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के तीसरे दिन आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने लोगों को संबोधन करते हुए कहा कि अहंकार झुकने नहीं देता है, दूसरों को झुका देता है और विनयवान हमेशा झुक कर काम करता है। अहंकारी खजूर के वृक्ष की तरह होता है, आंधी-तूफान आते ही टूट जाता है। विनयवान घास की तरह होता है, आंधी-तूफान भी उसे उखाड़ नहीं पाती है।

उन्होंने कहा कि प्रजापाल अहंकारी था और उसने अपनी बेटी मैना सुंदरी का विवाह एक कोढी़ के साथ तय कर दिया। मैना सुंदरी स्वमानी थी, उसके भाग्य में कोढ़ी पति लिखा था, तो उसने स्वीकार किया। वह भयभीत नहीं हुई क्योंकि सम्यक दृष्टि, जैन और सच्चा व्यक्ति किसी से डरता नहीं है और न किसी पर अधिकार दिखाता है। जो न डरता है और न डराता है, वही व्यक्ति अपना कल्याण करता है। आचार्य श्री ने कहा कि व्यवहार से संबंध पवित्र व पावन होता है।

चढ़ाए गए 32 अर्घ्य 

बुधवार को विधान के तीसरे दिन आचार्य श्री (ससंघ) के निर्देशन में श्रीजी की शांतिधारा व अभिषेक करने का सौभाग्य ओमप्रकाश- प्रभादेवी सेठी (परिवार) को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के प्रमुख पात्रों द्वारा संगीतमय स्वर लहरियों के साथ पूजा-अर्चना कर विधान के 32 अर्घ्य चढ़ाए गए यह जानकारी समाज के प्रचार-प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सह संयोजक सुनील कुमार सेठी व जयकुमार छाबडा़ द्वारा दी गई।

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