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पश्चिम बंगाल के सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविर आरंभ: आचार्यश्री ज्ञान सागर जी महाराज का पूजन, दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना से हुआ शुभारंभ 


आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ लखनपुर, बारकोना, राजामेला, भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में हुआ। शिविरार्थियों के लिए किट वितरित की गई। वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। लखनपुर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की यह खबर…


लखनपुर। आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के सराक में आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ लखनपुर, बारकोना, राजामेला, भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में हुआ। पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित रीतेंद्र जैन, पंडित राजकुमार शास्त्री, पंडित नितिन शास्त्री, विदुषी स्नेहा जैन, सपना जैन, साधिका जैन ने प्रथम दिन आचार्यश्री ज्ञान सागर जी महाराज का पूजन, दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना के साथ शिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। शिविरार्थियों के लिए किट वितरित की गई। वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। मंदिर पदाधिकारी ने विद्वानों का सम्मान किया। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि पश्चिम बंगाल में सफेद टोपी लगाने की प्रथा नहीं है लेकिन, जिन मंदिर में सिर ढकने के लिए महिलाएं अपने पल्लू का और पुरुष सफेद टोपी का उपयोग करते हैं। इस कारण जब भी आप मंदिर की आते हैं तो टोपी लगाकर जिन दर्शन करने चाहिए। सभी धर्म में सिर ढकने की प्रथा है।

पंडित जयकुमार दुर्ग ने लक्ष्मणपुर में बच्चों को णमोकार मंत्र के महत्व को बताया। णमोकार मंत्र को हम महामंत्र क्यों कहते हैं। हमारे जीवन को किस प्रकार से विशुद्ध कर सकता है। इसके विषय में अपने वक्तव्य दिए। स्थानीय स्तर पर डॉ. प्रदीप जैन, रामदुलार जैन शक्तिपथ जैन शिक्षण शिविरों को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।

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