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जीवदया कार्यक्रम में गौसेवा कर अर्जित किया पुण्य: दिगंबर जैन सोशल ग्रुप ने खिलाया चारा, गुड़ और आटा


जीवदया और करुणा की भावना को आत्मसात करते हुए दिगंबर जैन सोशल ग्रुप अम्बाह द्वारा शुक्रवार सुबह परेड चौराहे पर स्थित छत्रपाली गौशाला में विशेष गौसेवा कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के सदस्यों ने गौशाला पहुंचकर विकलांग एवं असहाय गायों को चारा, गुड़ और आटा खिलाया अम्बाह से पढ़िए, मनोज जैन नायक /अजय जैन की यह खबर…


अम्बाह। जीव दया और करुणा की भावना को आत्मसात करते हुए दिगंबर जैन सोशल ग्रुप अम्बाह द्वारा शुक्रवार सुबह परेड चौराहे पर स्थित छत्रपाली गौशाला में विशेष गौसेवा कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर ग्रुप के सदस्यों ने गौशाला पहुंचकर विकलांग एवं असहाय गायों को चारा, गुड़ और आटा खिलाया तथा उनके स्वास्थ्य और देखभाल की जानकारी भी ली। कार्यक्रम महेशचंद जैन (एमपीईबी) एवं संजीव जैन ‘बिल्लू’ के मार्गदर्शन में हुआ। दोनों समाजसेवियों ने कहा कि जीवदया जैन धर्म का मूल आधार है और गौसेवा सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना गया है। उन्होंने बताया कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर गौशालाओं में पहुंचकर सहयोग करना चाहिए। जिससे निराश्रित एवं घायल गौवंश को बेहतर देखभाल मिल सके।

यह रहे उपस्थित 

इस सेवा कार्य में ग्रुप के अध्यक्ष संतोष जैन, महामंत्री विकास जैन ‘पांडे’, कोषाध्यक्ष नितिन जैन ‘लवली’, एवं संस्थापक अध्यक्ष सुशील जैन, कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र जैन ‘पटेल’ तथा अमित जैन ‘टकसारी’ सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। इसके साथ ही कुलदीप जैन, कपिल जैन ‘केपी’,अजय जैन बबलू,मनोज जैनसहित अन्य सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिला सदस्यों में मालती जैन, संध्या जैन, प्रीति जैन एवं रेखा जैन सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं। सभी ने मिलकर गौमाता को स्नेहपूर्वक चारा, गुड़ और आटा अर्पित किया।

जीवदया कार्यक्रम सतत जारी रहेंगे 

गौशाला परिसर में सदस्यों ने स्वच्छता व्यवस्था का भी अवलोकन किया और संचालकों से चर्चा कर भविष्य में नियमित सहयोग का आश्वासन दिया। मालती जैन ने कहा कि जीव मात्र के प्रति दया, सहानुभूति और सेवा की भावना ही सच्चा धर्म है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और युवाओं को सेवा कार्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। सभी ने संकल्प लिया कि आगे भी समय-समय पर जीव दया एवं गौसेवा जैसे कार्य निरंतर जारी रखे जाएंगे ताकि असहाय पशुओं को संरक्षण और सहारा मिल सके।

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