डॉ. जैनेंद्र जैन का पूरा जीवन सेवा, सामाजिक नेतृत्व, साहित्य, पत्रकारिता और मानवता को समर्पित रहा है। जरूरतमंदों की सहायता, प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और जैन संस्कृति का संरक्षण — उनका निरंतर पुरुषार्थ रहा है। 26 नवंबर को उनके जन्मदिन पर — श्रीफल जैन न्यूज़ की विशेष प्रस्तुति।
समाज में कुछ लोग नाम से नहीं, काम से पहचाने जाते हैं — और वही पहचान बनकर सामने खड़े हैं डॉ. जैनेंद्र जैन।
इंदौर। आज के समय में भागदौड़, भीड़भाड़ और स्वार्थ से भरी दुनिया में अगर कोई व्यक्ति पूरी निष्ठा से समाज के लिए जी रहा हो, तो उसे नमस्कार किए बिना मन नहीं मानता। ऐसी ही प्रेरक शख्सियत हैं — 79 वर्षीय डॉ. जैनेंद्र जैन।
जरूरतमंदों के लिए ‘पहला भरोसा’
कोई गरीब इलाज न करा पाए… किसी प्रतिभावान बच्चे के पास फीस भरने के पैसे न हों… कोई रोगी सहायता की तलाश में भटके… तो लोग रास्ता बता देते हैं — “छत्रपति नगर जाओ… डॉक्टर साहब से मिलो।”
श्री मूलचंद जैन पारमार्थिक ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने अनगिनत जरूरतमंदों को शिक्षा व चिकित्सा सहायता दिलवाई — और यह क्रम आज भी जारी है।
प्रतिभाओं को पहचान दिलाने के सूत्रधार
समाज में कई प्रतिभाशाली लोग मंच के अभाव में पहचान नहीं पाते। लेकिन डॉ. जैनेंद्र जैन ऐसे चेहरों को खोजते भी हैं और मंच भी दिलाते हैं। विभिन्न आयोजन कर प्रतिभाओं को सम्मानित करने की पहल के मुख्य शिल्पी वे ही रहे।
परवार समाज में सम्मान परंपरा के जनक
दिगंबर जैन परवार समाज में सम्मान परंपरा शुरू करने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है। श्री सोनेलाल जैन और श्री सुंदरलाल जैन बीड़ीवाल जैसे वरिष्ठ एवं दानवीर समाजसेवियों के अमृत महोत्सव का आयोजन कर उन्होंने सम्मान का नया अध्याय खोला। इस समारोह में केंद्रीय व प्रादेशिक मंत्रियों की उपस्थिति समाज आज भी याद रखता है।
पत्रकारिता — 35 वर्ष का सशक्त सफर
केवल सेवा तक सीमित नहीं… डॉ. जैनेंद्र जैन की लेखनी भी उतनी ही प्रभावशाली रही।
250+ संपादकों के नाम पत्र प्रकाशित
दर्जनों रेडियो वार्ताएँ इंदौर आकाशवाणी से प्रसारित
पत्र लेखक संघ, मध्यप्रदेश के संस्थापक एवं अध्यक्ष
काका हाथरसी द्वारा लिखी गई सराहना — “जैनेंद्र जैन, वंडरफुल मैन”
पत्रकारिता हो या साहित्य — उन्होंने हर मंच को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा।
धर्म में गहरी निष्ठा — और वाणी में जनचेतना
पिछले 25 वर्षों से आचार्य श्री विद्यासागर जी और आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के अनन्य भक्त। देश में सर्वप्रथम आचार्य श्री विद्यासागर जी को “भारत रत्न” अलंकरण दिलाने की मांग उठाने वाले वे ही रहे।
मंदिर एवं सामाजिक संस्थाओं के निर्माता
आदिनाथ दिगंबर जैन धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट, छत्रपति नगर के संस्थापक ट्रस्टी। मंदिर निर्माण — ऋषभ सभागृह निर्माण — अनेक समाज विकास कार्य उनके नेतृत्व में संपन्न हुए।
डॉ. जैनेंद्र जैन — परिचय (अंत में जैसा आपने निर्देश दिया)
जन्म: 26 नवंबर 1947 — बीना जिला सागर
1948 से इंदौर निवासी
1965 से क्वालिफाइड होम्योपैथिक चिकित्सक
35 वर्ष तक जूनी इंदौर में क्लिनिक
35 वर्षों तक हास्य-व्यंग बुलेटिन “जैन टाइम्स” के संपादक
अभी सनमती वाणी मासिक पत्रिका में सहयोगी संपादक
सोशल मीडिया पत्रकारिता में सक्रिय
चित्र विवरण
उपराष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा, राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह, अनुपम खेर, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, केंद्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य और पत्रकार अरुण शौरी सहित कई राष्ट्रीय हस्तियों के साथ सम्मान, साक्षात्कार एवं स्मारिका विमोचन के अवसर।
अंतिम पंचलाइन: समाज में कई लोग आते हैं, जाते हैं… पर कुछ लोग अपनी सेवा-सुगंध छोड़ जाते हैं। डॉ. जैनेंद्र जैन — ऐसे ही महकते नाम हैं।













Add Comment