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वर्तमान के शौक ऐसे मत करो, जिससे हमें पछताना पड़े : मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज ने बच्चों को संस्कारवान बनाने पर दिया जोर


मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में रहना है तो सम्यक संस्कार की बहुत अवश्यकता है। बिना संस्कार के व्यक्ति जीवन में एक कदम नहीं चल सकता।नांद्रे से पढ़िए यह खबर…


नांद्रे (महाराष्ट्र )। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्यश्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज, मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री श्रुतसागर महाराज भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर विराजमान हैं। मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में रहना है तो सम्यक संस्कार की बहुत अवश्यकता है। बिना संस्कार के व्यक्ति जीवन में एक कदम नहीं चल सकता। संस्कार को प्राप्त करना है तो गुरुओं सानिध्य में उनके चरणों में आना बहुत जरूरी है क्योंकि, बिना सही मार्ग पर दिखाने वाले एक गुरु ही होते है जहाँ व्यक्ति गलत मार्ग पर जाता है तो अन्त में गुरू दी याद आते है और घर के माता-पिता का भी कर्तव्य है कि वह अपने ब बच्चों को संस्कारवान बनाये।

प्रतिदिन मंदिर भेजे क्योंकि, हमारा बच्चा-बच्चा समाज का एक उगता हुआ सूरज है। आने वाला भविष्य है इसलिए संस्कार वान बनाओ। बच्चो को तो भविष्य भी उनका संस्कारित होगा और सम्यक सही मार्ग का भी बोध होगा। इसलिए सही मार्ग पर संस्कारी करो। इसलिए वर्तमान के शौक ऐसे मत करों, जिससे भविष्य में हमें पछताना पड़े। वर्तमान को ही अच्छे से जियो भविष्य अपने आप अच्छा हो जायेगा। वर्तमान को धर्म में लगाओ,बच्चों को संस्कारित करो, संस्कार दो। सम्यक एवं श्रेष्ठ जिससे भविष्य उज्जवल हो सके।

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